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श्रम संगठनों को प्रधानमंत्री का आश्वासन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को आगामी बजट पर श्रम संगठनों से चर्चा की है. इस बैठक में वामपंथी श्रम संगठनों के अलावा कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी समर्थित श्रम संगठन भी शामिल हुए. श्रम संगठनों ने प्रधानमंत्री से श्रम क़ानूनों में सुधार, रोज़गार के अवसर बढ़ाने और भविष्यनिधि की ब्याजदर बढ़ाने की मांग की है. प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया है कि वे उनकी माँगों का बजट में ध्यान रखेंगे. छह साल बाद ऐसा हुआ कि प्रधानमंत्री श्रमसंगठनों से मिल रहे थे. श्रम संगठनों ने एयरपोर्ट के निजीकरण का विरोध किया है और कहा है कि जब सरकार ख़ुद एयरपोर्ट को चला सकते थे तब क्यों उनका निजीकरण किया जा रहा है. उन्होंने श्रमिकों को हड़ताल का अधिकार दिलवाने का भी अनुरोध किया. उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फ़ैसले में कहा है कि श्रमिकों को हड़ताल करने का अधिकार नहीं है. इस मुलाक़ात के बाद इंटुक के संजीव रेड्डी ने कहा, "हमने सरकार से अनुरोध किया है कि वह निजी क्षेत्र के मज़दूरों के लिए एक वेलफेयर बोर्ड का गठन करे और बेरोज़गारी के दिनों में पेंशन दिलवाने का बंदोबस्त करे." सभी श्रम संगठनों की मुख्य माँग भविष्य निधि यानी पीएफ़ पर ब्याज़ की दर बढ़ाने की थी. एटक के नेता गुरुदास दासगुप्ता का कहना था कि प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया है कि वे इस पर विचार करेंगे. प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया है कि वे श्रमसंगठनों से लगातार चर्चा करते रहेंगे. |
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