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बुधवार, 07 नवंबर, 2007 को 19:32 GMT तक के समाचार
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परमाणु समझौते पर पुनर्विचार की माँग
परमाणु रिएक्टर
भाजपा ने पहले कहा था कि इस मुद्दे पर संसद में आम सहमति बने
भारत के प्रमुख विपक्षी दल, भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि अमरीका के साथ प्रस्तावित परमाणु क़रार पर नए सिरे से विचार करने की ज़रूरत है.

दिल्ली में बुधवार को भाजपा कोर समिति की बैठक में इस मुद्दे पर विचार विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया.

बैठक में भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया.

बैठक के बाद भाजपा की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि भारत और अमरीका के बीच प्रस्तावित परमाणु क़रार के मुद्दे पर नए सिरे से समझौते को तैयार करने की ज़रूरत है.

भाजपा का कहना है कि समझौते को नए सिरे से तैयार करते समय यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि इससे भारत के हितों या संप्रभुता को कोई नुक़सान न पहुँचे.

भाजपा पहले भी कह चुकी है कि परमाणु क़रार पर आगे जाने से पहले केंद्र सरकार को संसद में आम सहमति हासिल करनी चाहिए.

रविशंकर प्रसाद, भाजपा प्रवक्ता
 भाजपा अमरीका के साथ भारत के अच्छे संबंधों की पक्षधर है पर ये संबंध परमाणु समझौते के आधार पर तय नहीं होने चाहिए. भारत के परमाणु कार्यक्रम में यहाँ के वैज्ञानिकों और अभी तक की उपलब्धियों का बड़ा योगदान है. ऐसे में हम अपने हितों की अनदेखी करके यह समझौता नहीं कर सकते

ग़ौरतलब है कि भारत और अमरीका के बीच प्रस्तावित परमाणु क़रार के मुद्दे पर वामदलों की ओर से यूपीए सरकार को करारे विरोध का सामना करना पड़ रहा है और इससे सरकार के अस्तित्व तक पर सवाल खड़ा हो गया है.

वामदलों ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन शर्तों पर मौजूदा परमाणु क़रार हो रहा है वो कतई स्वीकार्य नहीं हैं.

इस दौरान अमरीका के भारत स्थित राजदूत डेविड मल्फर्ड, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन और राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा आयोग के प्रमुख अनिल ककोदकर सहित कई प्रमुख लोगों ने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से मुलाक़ात की है.

क़रार पर वार

इस बाबत बीबीसी से बात करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पिछले कुछ समय से भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से अमरीकी राजदूत, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और परमाणु ऊर्जा आयोग के प्रमुख ने मुलाक़ात की जिसके बाद से मीडिया में ऐसी ख़बरें आती रही थीं कि परमाणु क़रार के मसले पर भाजपा अपनी बात से पीछे हट रही है.

ऐसी स्थिति में यह ज़रूरी हो गया था कि भाजपा परमाणु क़रार पर अपना रुख़ एक बार फिर से स्पष्ट करे और इसीलिए बुधवार को जारी किया गया संयुक्त बयान ख़ासतौर पर मीडिया के लिए है.

भाजपा नेता
भाजपा ने परमाणु क़रार के मुद्दे पर संयुक्त बयान जारी किया है

उन्होंने कहा कि इन लोगों ने पार्टी के सामने अपना पक्ष रखा और पार्टी ने इस क़रार पर अपना रुख़ इन लोगों के सामने दोहराया.

भाजपा नेता ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी अमरीका या परमाणु क़रार की विरोधी नहीं है. उनका विरोध इस बात को लेकर है कि जिस रूप में फिलहाल समझौता हो रहा है उससे भारत के हितों को नुकसान होगा और ऐसा नहीं होना चाहिए.

रविशंकर प्रसाद ने कहा, "भाजपा अमरीका के साथ भारत के अच्छे संबंधों की पक्षधर है पर ये संबंध परमाणु समझौते के आधार पर तय नहीं होने चाहिए. भारत के परमाणु कार्यक्रम में यहाँ के वैज्ञानिकों और अभी तक की उपलब्धियों का बड़ा योगदान है. ऐसे में हम अपने हितों की अनदेखी करके यह समझौता नहीं कर सकते."

उन्होंने इस बात का खंडन किया कि भाजपा ने परमाणु क़रार पर अपना रुख़ बदला है और कहा कि वामदलों की तरह भाजपा अमरीका या साम्राज्यवाद विरोध की नीति पर काम करते हुए नहीं चल रही बल्कि खुले दिमाग से देश के हितों को देखकर चल रही है.

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