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'कार्यकाल पूरा न होने का कारण नहीं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश कारत ने कहा है कि 'प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ईमानदारी पर सवाल नहीं उठाया जा सकता...और...कोई कारण नहीं है कि सरकार अपना कार्यकाल पूरा न करे.' प्रकाश कारत ने कोलकाता के अंग्रेज़ी अख़बार द टैलिग्राफ़ के साथ बातचीत में प्रधानमंत्री और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के बारे में ये टिप्पणी की है. यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वाम दलों और यूपीए के बीच इस साल अगस्त से भारत-अमरीका परमाणु मुद्दे पर भीषण विवाद चल रहा है. पिछले कुछ हफ़्तों से पर्यवेक्षक लगातार इस बारे में अटकले लगा रहे हैं कि वाम दलों की नाराज़गी के चलते केंद्र सरकार कब तक चलेगी. राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि ताज़ा टिप्पणी से यूपीए और वाम दलों के रिश्ते सुधरने के संकेत मिले हैं. महत्वपूर्ण है कि मंगलवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारत-अमरीका परमाणु समझौते को 'सम्मानजनक' बताया था और कहा कि ये न केवल भारत बल्कि परमाणु अप्रसार की दृष्टि से दुनिया के हित में है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था, "घरेलू स्तर पर कुछ दिक्कतें हैं और हम उन्हें सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं.'' 'आम चुनाव जल्दी नहीं' द टैलिग्राफ़ में छपे इंटरव्यू में कारत ने कहा है, "ये सच है कि परमाणु मुद्दे पर प्रधानमंत्री और वाम दलों के रुख़ में मूलभूत मतभेद रहे हैं. इस सहमति के भारत के लिए फ़ायदों पर उनकी धारणाएँ हैं. लेकिन हमारे मतभेदों का मतलब ये नहीं कि हम प्रधानमंत्री का सम्मान नहीं करते. उनकी ईमानदारी पर सवाल ही नहीं उठाया जा सकता." कारत का ये भी कहना था कि ये राजनीतिक मुद्दा प्रधानमंत्री के किसी कथन या फिर व्यक्तिगत मतभेदों से नहीं बल्कि दलों के इस मुद्दे पर भिन्न रुख़ के कारण पैदा हुआ है. उन्होंने स्पष्ट किया, "हमारा भी मत यही है कि आम चुनाव जल्द नहीं होने चाहिए. कोई कारण नहीं है कि यूपीए सरकार अपना कार्यकाल पूरा न करे. इस बारे में प्रधानमंत्री और सोनिया गांधी के बयान की सराहना करनी चाहिए क्योंकि उन्होंने इसे - 'ये नहीं, तो कुछ नहीं' - ऐसा मुद्दा नहीं बनाया है." कारत ने वर्ष 2004 के चुनावों के बाद यूपीए को समर्थन देने का सीपीएम के फ़ैसले को 'ज़रूरी और सही' बताया है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'विकास के दुश्मन हैं क़रार के विरोधी'07 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस विवादों के बीच अल बारादई की यात्रा09 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस बयानों में नरमी से वामपंथी उत्साहित12 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस क्या यह मनमोहन-सोनिया की हार है?13 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस क्या है परमाणु समझौते का भविष्य?23 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'समझौते पर 2008 तक अमल हो जाए'16 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस परमाणु क़रार पर अहम बैठक21 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस परमाणु क़रार पर बातचीत की नई तारीख़22 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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