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'अमरीका ने कोई मेहरबानी नहीं की है' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सीपीआई के महासचिव एबी बर्धन का कहना है कि दो देशों के बीच कोई भी बड़ा समझौता ऐतिहासिक कहलाता है. अमरीका ने कोई मेहरबानी नहीं की है. उन्होंने अब माना है कि भारत भी एक परमाणु शाक्ति है और वो तो हम हैं ही. उन्होंने इसे पहले ही मान लिया था लेकिन मान्यता नहीं दी थी. परमाणु ईंधन के मामले में अमरीका रुकावट डालता था.वो न तो खुद ईंधन देते थे और न ही किसी और को देने देते थे. वो फ़्रांस और रूस के ईंधन देने से रोकता रहा है. हालाँकि रूस फिर भी ईंधन देता था. अब ये बंधन उठ जाएँगे और परमाणु ईंधन उपलब्ध होता रहेगा. इस समझौते का यही मतलब है. प्रधानमंत्री की परमाणु ईंधन के संबंध में हमसे चर्चा हुई थी. लेकिन इस दौरान रक्षा रणनीतिक समझौते की बात भी हुई है जिससे मैं सहमत नहीं हूँ. मेरा मानना है कि दोस्ती का रिश्ता अलग है, हम दोस्त बन सकते हैं लेकिन सामरिक साझेदार नहीं बन सकते. अमरीका की रक्षा रणनीति हमसे एकदम अलग है. वो छोटे देशों पर हमला करते हैं, साम्राज्यवादी हैं, हमलावर हैं, लड़ाई छेड़ते हैं. हमारी ऐसी नीति नहीं है. जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह वापस आएँगे तब उनका स्पष्टीकरण होगा और तभी सही बात सामने आएगी. जहाँ तक ईरान-पाकिस्तान-भारत पाइप लाइन का संबंध है तो इसमें अमरीका के दखलंदाजी करने का कोई मतलब नहीं है. अमरीका इसमें दखलंदाजी नहीं करेगा, ऐसी गारंटी भी हमने नहीं ली है. (आशुतोष चतुर्वेदी से बातचीत पर आधारित) | इससे जुड़ी ख़बरें परमाणु क्षेत्र में पूरे सहयोग का भरोसा18 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना परमाणु ऊर्जा पर भारत उत्साहित19 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में बदलाव की माँग24 अप्रैल, 2005 | पहला पन्ना 'हम दोनों देशों से संबंध सुधार रहे हैं'26 मार्च, 2005 | पहला पन्ना स्थायी सीट के लिए भारत ने दावा किया22 सितंबर, 2004 | पहला पन्ना भारत-अमरीका संबंध पर भारतीय लोगों की राय21 सितंबर, 2004 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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