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स्थायी सीट के लिए भारत ने दावा किया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनने के लिए औपचारिक तौर पर दावेदारी पेश कर दी है. भारत ने ब्राज़ील, जर्मनी और जापान के साथ मिलकर संयुक्त रूप से अपनी दावेदारी पेश की. इन देशों ने आपस में ये सहमति की है कि वे एक-दूसरे के दावे का समर्थन करेंगे. साथ ही उन्होंने ये भी कहा है कि अफ़्रीका के किसी देश को भी सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनाया जाना चाहिए. चारों देशों की ओर से जारी किए गए साझा बयान में कहा गया है,"सुरक्षा परिषद में 21वीं सदी में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सच्चाई झलकनी चाहिए".
अमरीका, ब्रिटेन, फ़्रांस, रूस और चीन सुरक्षा परिषद के अभी पाँच स्थायी सदस्य हैं. इसके अलावा सुरक्षा परिषद में 10 अस्थायी सदस्य भी हैं जिनका चुनाव हर दो साल के बाद होता है. साझा बयान सुरक्षा परिषद की स्थायी दावेदारी के लिए साझा बयान भारत, जर्मनी, जापान और ब्राज़ील के नेताओं की बैठक के बाद जारी किया गया. भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, जापानी प्रधानमंत्री जुनिचिरो कोइज़ुमी, जर्मन विदेश मंत्री जोश्का फ़िशर और ब्राज़ील के राष्ट्रपति इनेसियो लुला द सिल्वा ने इस बारे में न्यूयॉर्क में बैठक की.
बयान में कहा गया कि 1945 में अस्तित्व में आने के बाद से संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों की संख्या चार गुना बढ़ गई है जिनमें विकासशील राष्ट्रों की संख्या काफ़ी अधिक है. बयान में कहा गया,"सुरक्षा परिषद में स्थाई और अस्थाई सदस्यों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए और विकसित तथा विकासशील देशों को स्थाई सदस्य बनाया जाना चाहिए". संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुला और जापान के प्रधानमंत्री कोइज़ुमी ने अपने भाषणों में सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता के विस्तार की हिमायत की. संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान भी सुरक्षा परिषद को और प्रभावकारी बनाने के लिए इसके विस्तार के पक्षधर रहे हैं. |
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