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अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में बदलाव की माँग | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एशियाई देशों ने संयुक्त राष्ट्र समेत विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को ज़्यादा लोकतांत्रिक बनाने की माँग की है. इंडोनेशिया के ऐतिहासिक बांडुंग शहर में एफ़्रो-एशियाई सम्मेलन के स्वर्ण जयंती समारोह में अपने संबोधन में भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को न्यायोचित बनाने के लिए विकासशील देशों की आवाज़ सुनी जानी चाहिए. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार का उल्लेख किए बिना मनमोहन सिंह ने इस संबंध में विकासशील देशों का पक्ष रखने की कोशिश की. मनमोहन सिंह एशियाई देशों के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे. भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं को विकासशील देशों के हितों के अनुरूप योजनाएँ बनानी चाहिए. मनमोहन सिंह ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में गुटनिरपेक्ष आंदोलन को प्रासंगिक बताया. एकजुट उन्होंने एशिया और अफ़्रीका के देशों को अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों के मुक़ाबले के लिए एकजुट होने को कहा. जकार्ता में दोदिवसीय एफ़्रो-एशियाई शिखर सम्मेलन और बांडुंग के इस आयोजन के दौरान एशियाई देशों ने अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया और ख़ासकर दक्षिण एशियाई देशों ने अपने मतभेदों को भुलाकर सामूहिक महत्व के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया. मनमोहन सिंह और पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने सम्मेलन को संबोधित करने के दौरान एक दूसरे की तारीफ़ की. |
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