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समझौते के साथ शिखर सम्मेलन समाप्त | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में एशिया और अफ़्रीका के देशों का शिखर सम्मेलन दोनों महादेशों के बीच सहयोग के एक समझौते के साथ समाप्त हो गया है. आयोजकों के अनुसार दोनों महादेशों के बीच आर्थिक और राजनीतिक सहयोग के लिए एक ऐतिहासिक सहमति हुई है. अपने समापन भाषण में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुसिलो बाम्बांग युधोयुनो ने इस समझौते को मील का पत्थर बताया. एफ़्रो-एशियाई देशों का ऐसा सम्मेलन सबसे पहले 50 साल पहले हुआ था जिसके बाद गुट-निरपेक्ष आँदोलन की नींव पड़ी थी. सम्मेलन में लगभग 80 नेताओं ने भाग लिया जो दुनिया की दो-तिहाई आबादी का प्रतिनिधित्व कर रहे थे. सहमति सम्मेलन में हुए समझौते के तहत एशिया और अफ़्रीका के नेताओं ने दोनों क्षेत्रों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने पर प्रतिबद्धता जताई. साथ ही ग़रीबी और अल्प विकास, आतंकवाद तथा संगठित अपराध जैसी समस्याओं पर एकजुट नीति बनाए जाने का भी संकल्प जताया. दक्षिण अफ़्रीका के राष्ट्रपति थाबो एम्बेकी ने कहा कि अब ये सभी पक्षों की ज़िम्मेदारी बनती है कि वे इस समझौते का पालन करें. अफ़्रीका को अच्छी-ख़ासी सहायता करनेवाले देश जापान ने सम्मेलन में घोषणा की कि वह अगले तीन वर्षों में अफ़्रीका को दी जानेवाली सहायता राशि दोगुनी कर देगा. समयतालिका शिखर सम्मेलन की एक ख़ास उपलब्धि रही कि इसमें अगली बैठकों का समय तय कर लिया गया. नेताओं ने तय किया कि दोनों महाद्वीपों के विदेश मंत्री हर दो साल पर बैठक करेंगे. ऐसे ही राष्ट्राध्यक्षों की बैठक हर चार साल पर होगी. अगला शिखर सम्मेलन दक्षिण अफ़्रीका में होगा. |
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