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यूपीए और वामदलों के बीच अहम चर्चा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केंद्र के संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन और वामदलों के समन्वय समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को दिल्ली में हुई है. ईरान और दूसरे आर्थिक मसलों पर यूपीए सरकार की नीतियों से वामपंथी दलों की नाराज़गी के बीच इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इस बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि सरकार ने अपनी ओर से सभी विषयों पर वामदलों को जानकारी दी है. उधर वामदलों ने कहा है कि उन्होंने सरकार को अपनी इस चिंता से अवगत करवा दिया है कि नीतिगत मामलों में सरकार ने जो निर्णय पिछले दिनों लिए हैं उससे सरकार की छवि पर असर पड़ा है. ईरान को बातचीत का मुख्य मुद्दा बताते हुए सीपीएम के महासचिव प्रकाश करात ने कहा है कि वामदलों ने सरकार से कहा है कि वे छह मार्च को होने वाली आईएईए की बैठक के बाद कोई निर्णय लेंगे. उल्लेखनीय है कि ईरान पर आईएईए की बैठक में भारत ने जिस तरह से विरोध में मतदान किया है उससे वामपंथी दल काफ़ी नाराज़ हैं. प्रधानमंत्री के निवास पर हुई बैठक के बाद चिदंबरम ने कहा है कि इस बात की संभावना है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम के मसले पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) में मतदान होने से पहले दोनों के बीच एक और बैठक होगी. उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से रिटेल यानी खुदरा बाज़ार क्षेत्र में विदेशी निवेश और हवाई अड्डों के निजीकरण तक सभी विषयों पर चर्चा हुई है. ईरान के मसले पर उन्होंने बताया कि वामपंथी दलों ने ईरान के मसले पर संसद में चर्चा करवाने की माँग की है जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया है. इस बैठक से पहले असम में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के महासचिव प्रकाश करात का यह बयान भी अहम माना जा रहा था कि सीपीएम कांग्रेस और भाजपा के विकल्प के रुप में एक तीसरा राजनीतिक मोर्चा खड़ा करने की पक्षधर है. लेकिन इस बैठक के बाद इससे जुड़े सवाल पर चिदंबरम ने कहा कि वे मानते हैं कि सीपीएम नेता ने यह बात क्षेत्रीय स्तर की राजनीति के लिए कही गई होगी और यदि वो राष्ट्रीय स्तर के लिए कही गई होगी तो उसके बारे में वे क्या कह सकते हैं. वामदलों का पक्ष उधर बैठक के बाद वामपंथी दलों ने एक अलग पत्रकारवार्ता ली जिसमें उन्होंने कहा है कि वे ईरान के मसले पर छह मार्च को होने वाली आईएईए की बैठक के बाद ही कोई निर्णय लेंगे. इस बैठक में इस बात पर फ़ैसला होने की संभावना है कि आख़िर ईरान का मसला सुरक्षा परिषद में जाएगा या नहीं और उसके ख़िलाफ़ आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाने की क्या सूरत है. वामपंथी नेताओं ने कहा है कि वे संसद में बहस करना चाहते हैं जिससे कि लोगों को पता चल सके कि संसद की राय क्या है. उन्होंने कहा कि अगर ज़रुरत पड़ी तो वामपंथी दल इस बारे में ग़ैर भाजपा दलों के साथ तालमेल कर सकते हैं. लेकिन समाजवादी पार्टी के अविश्वास प्रस्ताव के बारे में वामदलों ने कहा है कि वे इसके पक्ष में नहीं हैं. वाम नेताओं ने कहा है कि वे मानते हैं कि सरकार की ग़लत निर्णयों से सरकार की छवि पर भी असर पड़ा है. | इससे जुड़ी ख़बरें ईरान पर अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी12 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस ईरान मामले पर संसद में बहस की मांग05 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस भारत ने ईरान के ख़िलाफ़ मतदान किया04 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस हवाई अड्डा कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त04 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस भारत ने खुदरा क्षेत्र को और उदार बनाया24 जनवरी, 2006 | कारोबार कांग्रेस ने दी वामपंथियों को चेतावनी22 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस पश्चिम बंगाल में नया राजनीतिक मोर्चा11 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस ईरान पर सरकार और वामदल एकमत21 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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