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भारत ने खुदरा क्षेत्र को और खोला | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत सरकार ने अपनी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा को और अधिक उदार बनाते हुए खुदरा क्षेत्र, हवाई अड्डे और खनन के क्षेत्र में और ज़्यादा विदेशी निवेश को अनुमति दे दी है. दिल्ली में मंगलवार रात को हुई बैठक के बाद भारत के वाणिज्य मंत्री कमलनाथ ने इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि अब किसी एक ब्रांड की कंपनी को भारत में 51 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति होगी. अभी तक कई विदेशी रिटेल कंपनियों को स्थानीय कंपनियों के माध्यम से अपने उत्पाद बेचने पड़ते थे. ब्रांड कैबिनेट की बैठक के बाद कमलनाथ ने बताया, "पिछले 15 वर्षों में ये पहली बार है कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति की समीक्षा की गई है ताकि असंगति को दूर किया जा सके." उन्होंने कहा कि अब सरकार की मंज़ूरी लेकर कोई भी एक ब्रांड 51 प्रतिशत तक निवेश करके अपने उत्पादों का खुदरा व्यापार कर पाएगा. लेकिन वाणिज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि विदेशी कंपनियों को अपने उन्हीं उत्पादों को बेचने की अनुमति होगी जो अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में एक ब्रांड के नाम से बेचे जाते हैं जैसे- रीबोक, नोकिया, एडीडैस. सरकार ने स्पष्ट किया है कि रिटेल दूकानों की संख्या की कोई सीमा नहीं होगी. भारत को विदेशी निवेश से प्रतिवर्ष क़रीब चार अरब से पाँच अरब डॉलर मिलते हैं. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अपनी बैठक में इस बात को मंज़ूरी दे दी है कि पाकिस्तान के कराची शहर में वाणिज्य दूतावास दोबारा खोला जाएगा. यह दूतावास 1975 में बंद कर दिया गया था. | इससे जुड़ी ख़बरें भारत में एक अरब डॉलर लगाएगा इंटेल05 दिसंबर, 2005 | कारोबार कठिन है डगर औद्योगिक विकास की05 नवंबर, 2005 | कारोबार दूरसंचार में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ी20 अक्तूबर, 2005 | कारोबार निवेशकों को आश्वस्त करने के प्रयास23 सितंबर, 2005 | कारोबार 'भारत में कारोबार करना बहुत कठिन'15 सितंबर, 2005 | कारोबार मारुति के 8 फ़ीसदी शेयरों का विनिवेश02 सितंबर, 2005 | कारोबार क्या होती है विनिवेश की प्रक्रिया?02 सितंबर, 2005 | कारोबार लाभकारी कंपनियों का विनिवेश नहीं16 अगस्त, 2005 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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