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लाभकारी कंपनियों का विनिवेश नहीं | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की उन तेरह कंपनियों का विनिवेश नहीं करने का फ़ैसला किया है जो फ़ायदे में चल रही हैं. केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री एसएस पलानिमणिक्कम एक लिखित बयान के ज़रिए संसद को इसकी सूचना दी. जिन कंपनियों के शेयर सरकार निजी हाथों में नहीं बेचेगी उनमें नेशनल एल्यूमिनियम कॉर्पोरेशन (नाल्को), शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (एससीआई), नेशनल फर्टिलाइज़र लिमिटेड (एनएफ़एल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपी) शामिल हैं. केंद्र की यूपीए गठबंधन सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामपंथी दलों की माँग रही थी कि फ़ायदे में चल रही सरकारी कंपनियों का विनिवेश नहीं किया जाए. पहले इन कंपनियों का विनिवेश करने की योजना पिछली सरकार के कार्यकाल में बनाई गई थी लेकिन वामपंथी दबाव को देखते हुए इसे रोक दिया गया है. वामपंथी दलों का कहना है कि फ़ायदे में चलने वाली कंपनियों का विनिवेश सरकार चलाने के न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) के ख़िलाफ़ है. वामपंथी गठबंधन ने सरकार को इसी शर्त पर समर्थन दिया है कि वह सीएमपी का पालन करेगी. इससे पहले सरकार ने भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स (भेल) का विनिवेश करने का फ़ैसला किया था लेकिन वामपंथी दलों के विरोध के कारण इसे रोक दिया गया. |
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