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विनिवेश समझदारी से होः मनमोहन सिंह | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के पूर्व वित्तमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह का कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र की जो इकाइयाँ लाभ में हैं उनका विनिवेश नहीं किया जाना चाहिए. आर्थिक विकास पर कांग्रेस का दृष्टि - पत्र बुधवार को जारी करने के बाद बीबीसी हिंदी सेवा से विशेष बातचीत में मनमोहन सिंह ने कहा कि अब कृषि पर सब्सिडी में और कटौती की ज़रुरत नहीं है. मनमोहन सिंह जी, अब भारतीय जनता पार्टी भी आर्थिक उदारीकरण की बात कर रही है तो भाजपा के आर्थिक उदारीकरण और कांग्रेस की नीतियों में क्या फ़र्क़ है? देखिए सबसे बड़ा फ़र्क तो ये है कि 1998 में जब चुनाव हुए थे तो उन्होंने आर्थिक उदारीकरण का बहुत विरोध किया था. फिर भाजपा ने कृषि, रोज़गार और सामाजिक क्षेत्र की उपेक्षा की. अगर हमारी सरकार सत्ता में आई तो इन क्षेत्रों में काम करेंगे और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी काम करेंगे. विनिवेश के बारे में आपकी पार्टी कुछ नहीं कर रही है? हम इस बारे में चुप नहीं हैं. हमारे चुनावी घोषणा पत्र में हमने विस्तार से इसके बारे में इसके बारे में बात की है. सार्वजनिक क्षेत्र के जो प्रतिष्ठान फ़ायदे में हैं और जो निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठानों के साथ प्रतियोगिता कर सकते हैं हमारी दृष्टि में उनका विनिवेश करने की ज़रुरत नहीं है. जो प्रतिष्ठान घाटे में चल रहे हैं उनके विनिवेश पर हमें कोई आपत्ति नहीं है. बेरोज़गारी दूर करने के लिए आप क्या करेंगे? यदि आप देखें तो 1983 से 1993 तक रोज़गार विकास दर 0.4 प्रतिशत थी.
इसका मतलब यह है कि यदि राष्ट्रीय आय एक प्रतिशत बढ़ती है तो रोज़गार के अवसर 0.4 प्रतिशत बढ़ते हैं. पिछले पाँच-छह सालों में यह घटकर यह 0.15 प्रतिशत रह गई है. हमारी कोशिश होगी कि निवेश और रोज़गार का ऐसा ढाँचा खड़ा किया जाए जिससे वही रोज़गार दर फिर से हासिल की जा सके. डॉ सिंह आपने कृषि क्षेत्र में सब्सिडी में कटौती की बात शुरु की थी, अब आपकी क्या राय है? मैं नहीं कहता कि सब्सिडी कोई पवित्र चीज़ है लेकिन जो सब्सिडी अभी किसानों को दी जा रही है वह इतनी नहीं है कि उसमें कटौती की जाए. |
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