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'भारत में कारोबार करना बहुत कठिन' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वर्ल्ड बैंक की एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण एशियाई देशों में, भारत कारोबार करने के लिए सबसे मुश्किल देश है. दुनिया भर में इस मामले में भारत को 116वाँ स्थान मिला है जो चीन और पाकिस्तान से बहुत पीछे है. 'डूइंग बिज़नेस इन 2006' शीर्षक से प्रकाशित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत व्यापारियों को सुविधा देने और नियमों में सुधार करने के मामले में बाक़ी देशों से बहुत पीछे चल रहा है. इस रिपोर्ट में कहा गया है भारत में राजस्व करों में तो कटौती की गई है लेकिन अब भी किसी वस्तु का आयात करना एक बेहद जटिल प्रक्रिया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में किसी वस्तु का आयात करने के लिए कम से कम 15 दस्तावेज़ तैयार करने होते हैं और 27 जगह दस्तख़त किए जाते हैं. भारत में कालाबाज़ारी की समस्या भी किसी अन्य दक्षिण एशियाई देश से कम नहीं है. इस रिपोर्ट में पाकिस्तान 60वें, श्रीलंका 71वें, नेपाल 75वें और मालदीव 31वें स्थान पर हैं. विश्लेषकों का कहना है कि विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी भारत में बढ़ रही है लेकिन इस रिपोर्ट में भारत की बहुत ही नकारात्मक छवि पेश की गई है. एनडीए की सरकार में विनिवेश मंत्री रहे अरूण शौरी का कहना है कि अफ़सरशाही बाधाएँ समाप्त की जानी चाहिए और नए व्यापार शुरू करने वाले लोगों को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए. वे कहते हैं, "भारतीय उद्यमी चीन में जाकर कारोबार कर रहे हैं क्योंकि वहाँ की सरकार उनकी मदद कर रही है, वहाँ किसी प्रांत के मेयर या गवर्नर का आकलन इस बात से भी होता है कि वह अपने क्षेत्र में कितना विदेशी निवेश ला पाता है." फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन चैंबर ऑफ़ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्रीज़ यानी फ़िक्की के अध्यक्ष ओंकार सिंह कंवर कहते हैं कि "यह रिपोर्ट चिंताजनक है और ऐसे समय पर आई है जबकि विदेशी कंपनियाँ भारत में निवेश के बारे में गंभीरता से सोच रही हैं." |
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