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आर्थिक सुधार जारी रखने का वादा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका में विश्व बैंक की बैठक में भाग लेने के बाद भारत के वित्त मंत्री पी चिदंबरम अब ब्रिटेन में हैं. ब्रिटेन में वे उद्योगपतियों और व्यवसायियों से मिलकर उन्हें विश्वास दिलाने की कोशिश कर रहे हैं कि भारत में आर्थिक सुधारों की गति धीमी नहीं पड़ेगी. लंदन आए भारत के वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने ब्रिटेन में अर्थ वित्त जगत से जुड़े लोगों को स्पष्ट तौर पर बताया है कि वो किन क्षेत्रों में विदेशी निवेश चाहते हैं. उन्होंने कहा, “हम टेलीकॉम के क्षेत्र में 40 अरब डॉलर का निवेश चाहते हैं, अगले दस साल में ऊर्जा के क्षेत्र में हर वर्ष 10 अरब डॉलर का निवेश चाहते हैं, यातायात ख़ास तौर पर नागरिक उड्डन और बंदरगाहों और सड़कों और खदानों से जुड़े क्षेत्रों में निवेश चाहते हैं.” चिदंबरम ने कहा कि इन क्षेत्रों में वो विदेशी निवेश की सीमा को धीरे-धीरे ख़त्म करने के पक्षधर हैं और सीमा शुल्क भी कम करके उसे दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के स्तर पर लाना चाहते हैं. पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या वामपंथी दल आर्थिक सुधार की गति पर लगाम कसने की कोशिश नहीं कर रहे हैं, तो चिदंबरम का कहना था कि “वामपंथी दल हमारी सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं, हम इस बारे में उनसे लगातार बातचीत कर रहे हैं, लेकिन निवेशकों को उससे चिंतित होने की ज़रूरत नहीं है. वामपंथी दलों की चिंता भारत के करोड़ों ग़रीबों को लेकर है और वही चिंता काँग्रेस पार्टी की भी है.” भारत के वित्त मंत्री ने कहा कि आज की तारीख़ में भारत के किसानों को बहुत फ़ायदा हो सकता है अगर विश्व बैंक की बातें सभी देश मानें, लेकिन भारत की चिंता ये है कि कई विकसित देश अपने किसानों भारत से भी ज़्यादा सब्सिडी दे रहे हैं जबकि भारत को सब्सिडी कम करने के लिए कह रहे हैं. विश्व बैंक हाल ही में अमरीका में वित्त मंत्री ने अमरीका में विश्व बैंक के अधिकारियों से बात की. विश्व बैंक की ताज़ा रिपोर्ट में बताया गया है कि आर्थिक सुधारों के मामले में भारत का स्थान कुछ जगहों पर पाकिस्तान से भी ख़राब है, मसलन एक नई कंपनी रजिस्टर कराने में पाकिस्तान में 29 दिन लगते हैं जबकि भारत में 89 दिन. इसी तरह वर्ल्ड बैंक के अनुसार भ्रष्टाचार में भी भारत की स्थिति दूसरे दक्षिण एशियाई देशों की तरह ही ख़राब है बल्कि कुछ देशों से बदतर है. इसकी सफ़ाई देते हुए उन्होंने कहा, “आम तौर पर जितनी प्रगति हमने की है उसको लेकर विश्व बैंक खुश है. ये सच है कि विश्व बैंक को कई बातों को लेकर चिंता है, हमारी इन विषयों पर बात भी हुई है और हम कोशिश कर रहे हैं कि उनकी चिंताएँ दूर करें.” कुल मिलाकर चिदंबरम पर पश्चिमी देशों के संगठनों और उद्योगपतियों ने आर्थिक सुधारों की गति तेज़ करने के लिए दबाव बढ़ाया है और चिदंबरम ने आम तौर पर ऐसा करने का वादा भी किया है. भारत में विदेशी निवेश बढ़ाने की कोशिश में चिदंबरम ने ये भी कहा है कि वो नए क्षेत्रों में विदेशी निवेश चाहते हैं मसलन चिकित्सा और ख़ासकर मेडिकल ट्रांस्क्रिप्शन के क्षेत्र में. |
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