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तेल की बढ़ती क़ीमतों पर चिंता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष आईएमएफ़ ने तेल की बढ़ती क़ीमतों का विश्व अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव पर गहरी चिंता जताई है. वॉशिंगटन में हुई बैठक में तेल की क़ीमत में बनी हुई अस्थिरता के बारे में चिंता व्यक्त करते हुए कहा गया कि इससे विश्व की अर्थव्यवस्था में हो रही प्रगति के लिए ख़तरा बढ़ गया है. मुद्रा कोष ने अनुमान लगाया कि इस साल विश्व की अर्थ व्यवस्था में 5 प्रतिशत की वृद्धि होगी. यह तीन दशकों में सबसे ज़्यादा वार्षिक दर होगी. लेकिन मुद्रा कोष यह मानता है कि अगर तेल की क़ीमत इसी तरह बढ़ती रही तो बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है. ब्रिटेन के वित्त मंत्री और मुद्रा कोष की मुद्रा और वित्त समिति के अध्यक्ष गोर्डन ब्राउन ने कहा है कि अर्थव्यवस्था में प्रगति सभी जगह एक जैसी नहीं रही है और ज़रूरत इस बात की है कि तेल की ज़्यादा खपत वाले ग़रीब देशों को इस समस्या से बचाने के लिए कोई क़दम उठाया जाए. संवाददाताओं का कहना है कि समस्या को पहचानना तो आसान है लेकिन समाधान कठिन है. मंत्री चाहते हैं कि तेल का उत्पादन बढ़ाया जाए लेकिन जितना उत्पादन किया जा सकता है, लगभग उतना पहले से ही किया जा रहा है. इसके अलावा मंत्री यह भी चाहते हैं कि बाज़ारों में पारदर्शिता हो, जिसका मतलब यह है कि आपूर्ति और मांग के बारे में सही जानकारी मिलनी चाहिए. |
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