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डब्लूटीओ: बातचीत में प्रगति के संकेत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विश्व व्यापार संगठन के नए प्रस्ताव पर बातचीत जारी है और संकेत हैं कि कृषि से जुड़े मामलों में रात भर बातचीत के बाद कुछ प्रगति भी हुई है. लंबे विवाद और गतिरोध के बाद आख़िर शुक्रवार को विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ) ने एक नया प्रस्ताव रखा था. उल्लेखनीय है कि कैनकुन सम्मेलन के बाद से ही कृषि और कृषि व्यापार से जुड़े मसलों पर विकसित और विकासशील देशों के बीच विवाद चला आ रहा है. जिनेवा में चल रही डब्लूटीओ की बैठक में नए प्रस्ताव को स्वीकार करने या नकारने के लिए मध्यरात्रि तक का समय दिया गया था लेकिन इस मुद्दे पर बात लगातार चौदह घंटों तक चलती रही. इस बैठक के दौरान प्रस्ताव पर एक एक बिंदु पर चर्चा हुई. शनिवार की सुबह बैठक ख़त्म होने के बाद प्रमुख गुटों ने बातचीत में हुई प्रगति की समीक्षा की. प्रस्ताव में किए गए संशोधनों के बारे में ब्राज़ील के विदेश मंत्री सेल्सो एमोरिम का कहना था कि जो परिवर्तन हुए वे सभी सकारात्मक दिशा में ही हुए हैं. उनका कहना था, "यदि बाक़ी देश इसे स्वीकार कर सकते हैं तो हम क्यों नहीं." मसले माना जाता है कि डब्लूटीओ में कृषि को लेकर विवाद है लेकिन बीबीसी संवाददाता का कहना है कि यह अकेला ऐसा मसला नहीं है जिसे सुलझाना है. हालांकि अभी प्रस्ताव पर सहमति बनती हुई दिख रही है लेकिन अभी यह चुनौती बनी ही हुई है कि आख़िर में सभी सदस्य देशों की सहमति से इसे पारित करवाना भी ज़रुरी होगा. वैसे तो बैठक शुक्रवार को ख़त्म हो जानी थी इसलिए डब्लूटीओ को लग रहा है कि मसले मंत्रियों और राजनयिकों के वापस लौटने से पहले ही सुलझा लिए जाएँ. उल्लेखनीय है कि कृषि और कृषि उत्पादों के मसले पर ही कैनकुन में डब्लूटीओ की बैठक बिना निर्णय ख़त्म हो गई थी. डब्लूटीओ के अधिकारी कह रहे हैं कि यदि इस बार कोई ठोस फ़ैसला नहीं हो सका तो आर्थिक उदारीकरण की प्रक्रिया कई वर्षों के लिए रुक जाएगी. |
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