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दुख सुख बाँटने की आउटसोर्सिंग | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आउटसोर्सिंग की परिभाषा धीरे-धीरे बदलती नज़र आ रही है. वैसे तो कर्नाटक का शहर बंगलौर आउटसोर्सिंग के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है. लेकिन अब अमरीका और यूरोप की कंपनियाँ अन्य तरह के काम यहाँ की कंपनियों से करवा रही हैं. लेकिन अब आउटसोर्सिंग यानी अपना काम किसी और से करवाने की नीति में एक दिलचस्प बदलाव आ रहा है. अब कुछ लोग विदेश में रहकर अपना निजी काम बंगलौर से करवा रहे हैं. अमरीका में रहते हुए वे खाना मँगवाने, दवाइयाँ खरीदने और यहाँ तक कि नए कपड़े खरीदने के लिए भी बंगलौर की एक कंपनी की मदद ले रहे हैं. पाँच सौ डॉलर प्रति माह के खर्च पर एक अमरीकी पत्रिका के संपादक अपना बहुत सा काम बंगलौर से करवा रहे हैं. उनका कहना है कि ऐसा करने से उनका काफ़ी वक़्त बच जाता है. हाल में उन्होंने इस कंपनी 'योर मैन इन इंडिया' के एक कर्मचारी से कहा कि वो उनके बेटे को फ़ोन पर कहानी सुनाकर उसका मन बहलाएँ. पिछले डेढ़ साल से यह कंपनी विदेश, ख़ासकर अमरीका में रह रहे भारतीय मूल के लोगों के लिए भारत में दस्तावेज़ प्राप्त करने, भेजने और सरकारी दफ़्तरों की भागदौड़ करता आया है. किसी छोटे शहर के अपने स्कूल से कोई सर्टिफिकेट निकालना हो या अमरीका में ग्रीन कार्ड हासिल करने के लिए जन्म प्रमाणपत्र की ज़रूरत, बिना भारत आए आप यह काम करवा सकते हैं. कई भारतीयों को ऐसी सेवा का फ़ायदा दिखा. बिना सफ़र किए वो कम दाम पर अपना काम करवा सकते हैं. मदद कुछ भारतीय मूल के विदेशी नागरिक अब इस कंपनी से उनके माता-पिता की सहायता करने को कह रहे हैं. अमरीकी शहर सियाटल में रह रहे एक डॉक्टर ने अपनी विधवा माँ के सुख-दुख जानने के लिए एक कंपनी से सहायता माँगी. चेन्नई की कौशल्या वेंकेटेश्वरन के तीन बच्चे विदेश में हैं. पति की मौत के बाद वो अपने जीवन में खालीपन महसूस कर रही थीं. पिछले कुछ महीनों से चारू नाम की एक लड़की उनका सुख-दुख बाँटती हैं. कौशल्या ने कहा, “चारू मेरी बेटी की तरह है. मैं जब चाहूँ उसे फ़ोन कर सकती हूँ और अपने दिल की बात कह सकती हूँ. वो ई-मेल के ज़रिए अमरीका में बैठे मेरे बेटे को मेरे हालचाल की ख़बर देती है. ” भारत में संयुक्त परिवार की प्रथा धीरे-धीरे खत्म हो रही है. विदेश में बसे भारतीय अपने बूढ़े माँ-बाप की देखभाल के लिए ज़्यादातर चिंतित रहते हैं. इस सर्विस पर निर्भर कर वो अपना कुछ मानसिक बोझ कम करते हैं. बंगलौर सहित दुनिया में कई ऐसी कंपनियाँ है जो कागज़ी काम में मदद पहुँचाती हैं. सस्ते दाम पर निजी सहायक से लेकर किसी और के बेटा-बेटी होने का कर्तव्य निभाना, यह सब काम आप भारत से हज़ारों मील दूर बैठकर भी करवा सकते हैं. |
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