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साइबर अपराध पर बोले मनमोहन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के एक कॉलसेंटर से सूचनाओं की कथित रुप से हुई चोरी की ख़बरों के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधावार को साइबर क़ानूनों को लेकर एक बैठक की है. उन्होंने सूचना प्रोद्योगिकी मंत्रालय और नैस्कॉम से कहा है कि वे मौजूदा क़ानूनों में सुधार के लिए अपने सुझाव दें. उल्लेखनीय है कि ब्रितानी अख़बार 'द सन' में एक रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद भारत के कॉल सेंटरों की विश्वसनीयता और साख को लेकर बड़े सवाल उठाए गए थे. 'द सन' के अनुसार उसके एक रिपोर्टर ने गुप्त रूप से काम करते हुए ब्रिटेन के बैंकों में खाते रखने वाले कई लोगों की आर्थिक स्थिति की जानकारी एक भारतीय कंप्यूटर विशेषज्ञ से प्राप्त की. इन ख़बरों के बाद मनमोहन सिंह ने बुधवार को एक विशेष बैठक की. इस बैठक में उन्होंने साइबर अपराधों, सूचनाओं की गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए सरकार और इस व्यवसाय से जुड़े उद्योगों के संगठनों द्वारा उठाए कदमों की समीक्षा की. प्रधानमंत्री के प्रेस सलाहकार संजय बारू ने एक बयानी जारी करके कहा है मनमोहन सिंह ने कहा है "सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और नैस्कॉम को सुझाव देने चाहिए जिससे कि किसी भी गोपनीय जानकारी को सार्वजिनिक करने और किसी भी व्यावसायिक जानकारी के असंवैधानिक रुप से किसी को दिए जाने के ख़िलाफ़ साइबर अपराध को दंडनीय बनाया जा सके." प्रधानमंत्री ने डेटा प्रोसेसिंग व्यवसाय में गुणवत्ता, गोपनीयता और विश्वसनीयता बनाए रखने की ज़रुरत को रेखांकित किया. उन्होंने कहा है कि भारत ने कड़ी मेहनत, लगन और प्रतिबद्धता से डेटा प्रोसेसिंग व्यवसाय में प्रतिष्ठा हासिल की है और किसी एक व्यक्ति की दिग्भ्रमित कार्यों से इस पर आँच नहीं आनी चाहिए. इस बैठक में भारतीय सॉफ़्टवेयर उद्योगों की केंद्रीय संस्था नैस्कॉम के महानिदेशक डॉ किरण कार्णिक भी मौजूद थे. प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि डॉ कार्णिक ने प्रधानमंत्री को आश्वासन दिया है कि भारतीय डेटा गोपनीयता बनाए रखने को प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि सूचनाएँ लीक करने की जो ताज़ा घटनाएँ हुई हैं वह बढ़ती प्रतिस्पर्धा के चलते भारतीय उद्योग को बदनाम करने के लिए किया गया स्टिंग ऑपरेशन भी हो सकता है. |
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