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आउटसोर्सिंग का विरोध ग़लत: वाजपेयी
भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने यूरोपीय संघ के देशों और अमरीका में आउटसोर्सिंग के ख़िलाफ़ हो रहे विरोध पर कड़ी आपत्ति जताई है. यूरोप और अमरीका में कर्मचारी संगठन आउटसोर्सिंग का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि उनको लगता है कि इससे उनके देश में नौकरियों पर संकट मँडरा रहा है. यूरोपीय संघ और भारत के व्यापारिक सम्मेलन के आख़िरी दिन वाजपेयी ने कहा कि आउटसोर्सिंग को लेकर यूरोप और अमरीका के पास पाने को बहुत कुछ और खोने को बहुत कम है. वाजपेयी ने विकसित देशों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ग़रीब देशों की चिंताओं की अनदेखी की गई, तो आर्थिक सुधार धरा का धरा रह जाएगा. उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि भारत में दूसरे चरण के सुधारों को नया रूप दिया जाएगा और कृषि और बुनियादी क्षेत्रों में और सुधार किया जाएगा. सम्मेलन के आख़िरी दिन यूरोपीय संघ और भारत के बीच 18 विंदुओं वाले एक एजेंडे पर भी सहमति हो गई, जिसमें 'अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद'से निपटने से लेकर अफ़ग़ानिस्तान और इराक़ में शांति और स्थिरता के लिए क़दम उठाने की बात कही गई है. दोनों ने एक साझा बयान जारी करके यह भी कहा कि वे बहुपक्षीय व्यापार पर उच्चस्तरीय बातचीत जारी रखेंगे. 'विरोध ग़लत' यूरोपीय संघ और भारत के बीच व्यापार सम्मेलन के आख़िरी दिन वाजपेयी ने पश्चिमी देशों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की कि आउटसोर्सिंग का विरोध ठीक नहीं. वाजपेयी ने कहा, "यह सिर्फ़ भावनात्मक बाते हैं कि आउटसोर्सिंग के कारण नौकरियाँ ख़त्म हो जाएँगी. दरअसल आउटसोर्सिंग से प्रतियोगिता बढ़ रही है और साथ में अमरीका और यूरोप की पहुँच भी बढ़ रही है." उन्होंने कहा कि फॉर्च्यून 500 में शामिल कंपनियों में से 200 कंपनियाँ भारत को अपने विकास और शोध कार्यों का अड्डा बना रही हैं.
प्रधानमंत्री ने कहा, "अगर लोग वहाँ नहीं जा सकते जहाँ व्यापार है, तो व्यापार ही वहाँ आ जाएगा जहाँ लोग हैं." वाजपेयी ने भारत में आर्थिक सुधारों को जारी रखने की बात कही और बताया कि भारत में इस समय दूसरे चरण के सुधार चल रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस चरण में कृषि और बुनियादी क्षेत्रों में सुधार किया जाएगा.
लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि विश्व व्यापार संगठन में कृषि मुद्दों पर कोई भी फ़ैसला लाखों लोगों की जीविका को ध्यान रखते हुए किया जाएगा. वाजपेयी ने कहा, "विश्व व्यापार संगठन एक ऐसा रथ है जिससे कई घोड़े खींच रहे हैं. अगर रथ को खींचने वाले घोड़े अलग-अलग दिशाओं में रथ को खींचेंगे तो रथ टूट जाएगा." इससे पहले यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष रोमानो प्रोदी ने कहा कि कैनकुन में नाकाम हुई विश्व व्यापार संगठन की बातचीत को नए सिरे से आगे बढ़ाने की ज़रूरत है. उन्होंने कहा कि भारत भी इससे सहमत है कि बातचीत की नाकामी से यूरोपीय संघ के साथ भी व्यापार के मुद्दे पर कुछ रुकावट आई है. |
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