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'अभी भारत में और आर्थिक सुधार की ज़रुरत'
यूरोपीय संघ के विदेश मामलों के आयुक्त क्रिस्टोफ़र पैटन ने कहा है कि यदि यूरोपीय संघ के साथ व्यावसायिक संबंध बढ़ाना है तो भारत को अपना आर्थिक सुधार कार्यक्रम जारी रखना चाहिए. शुक्रवार तो भारत और यूरोपीय संघ के चौथे सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अच्छे आर्थिक सुधारों के बावजूद अभी भारत की छवि ऐसी नहीं है कि उसके साथ व्यापार किया जाए. उन्होंने भारत में व्यवसाय की ख़राब स्थिति के लिए लालफ़ीता शाही, ख़राब ढाँचागत सुविधाओं और श्रम क़ानूनों को दोषी ठहराया. पैटन ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ एक व्यापार कार्यक्रम पर भी हस्ताक्षर करने वाले हैं. भारत के विदेश मंत्री यशवत सिन्हा ने कहा कि वे इस बात से सहमत हैं कि भारत को अपने व्यापार के नियम क़ायदे इस तरह बनाने होंगे कि विदेशी निवेशकों को परेशानी न हो. इस सम्मेलन में द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने और इसमें पेश आ रही बाधाओं को दूर करने पर चर्चा होनी है. यूरोपीय संघ के साथ ये सम्मेलन विभिन्न भारतीय उद्योग संगठनों ने भारत सरकार के साथ मिल कर आयोजित किया है. इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए यूरोपीय संघ के अध्यक्ष बरलुस्कोनी को भी आना था लेकिन तबियत ख़राब होने की वजह से वे नहीं आ सके. भारतीय उद्योग परिसंघ(सीआईआई) के महानिदेशक तरुण दास ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भारत यूरोपीय संघ का बड़ा व्यापार सहयोगी है और भारत के साथ उसका कारोबार 25 अरब यूरो तक पहुँचने की उम्मीद है. उन्होंने जानकारी दी कि इसमें लगभग 350 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं जिसमें से 100 से अधिक यूरोपीय संघ के हैं. |
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