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शुक्रवार, 02 सितंबर, 2005 को 11:15 GMT तक के समाचार
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क्या होती है विनिवेश की प्रक्रिया?

इंडियन ऑयल
इंडियन ऑयल का विनिवेश नहीं करने का सरकार ने वादा किया है
विनिवेश प्रकिया में निवेश का उलटा होता है. निवेश यानी किसी कारोबार में, किसी संस्था में, किसी परियोजना में रकम लगाना और विनिवेश यानी उस रकम को वापस निकालना.

सरकार को निवेश करने से तमाम कंपनियों में शेयर हासिल हुए हैं. शेयर एक तरह की मिल्कियत के सबूत होते हैं.

विनिवेश प्रक्रिया के जरिए सरकार अपने शेयर किसी और पक्ष को बेचकर संबंधित कंपनी की मिल्कियत से भी छुटकारा पा जाती है और उसे दूसरी योजनाओं पर ख़र्च करने के लिए धन भी मिल जाता है.

विनिवेश का एक उद्देश्य कंपनी का बेहतर प्रबंधन होता है. उदारीकरण की प्रक्रिया के तहत यह विचार सामने आया कि सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थान सिर्फ़ और सिर्फ़ मुनाफ़े को ध्यान में रखकर काम नहीं करते इसलिए उनके कामकाज में मुनाफ़ा ज्यादा नहीं होता.

फिर यह बात भी समझ में आई कि सरकार का काम कारोबार करना नहीं है, देश चलाना है इसलिए सरकार को सार्वजनिक कंपनियों से विनिवेश करके उनसे अलग हट जाना चाहिए.

विनिवेश या तो किसी निजी कंपनी के हाथ किया जा सकता है या फिर उनके शेयर पब्लिक में जारी किए जा सकते हैं.

पर उद्देश्य यही होता है कि सरकार उस कंपनी से अपने हाथ खींच ले और अपना पैसा बाहर निकाल ले. भारत में विनिवेश भारी राजनीतिक विवादों के विषय रहे हैं, क्योंकि विनिवेश में घपले-घोटाले की आशंकाएं होती हैं.

शेयर किस पक्ष के हाथ में जाएँ, यह विवाद का विषय हो सकता है. सेंटूर होटल के विनिवेश का विवाद इसी किस्म का विवाद है.

राजनीतिक असर का प्रयोग करके शेयर कहीं सस्ते में तो नहीं बेच दिए गए या किसी अपने खास आदमी या समूह को ही तो नहीं दे दे दिए गए. इस तरह के विवाद विनिवेश में अक्सर आते रहते हैं.

जिन मामलों में सार्वजनिक कंपनियों के शेयर पब्लिक को जारी किए गए, उनमें विवाद कम देखने में आया जैसे ओएनजीसी के मामले में.

इसके अलावा, यह भी समझना ज़रूरी है कि निजीकरण और विनिवेश में अंतर है, निजीकरण में सरकार अपने 51 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी निजी क्षेत्र को बेच देती है जबकि विनिवेश की प्रक्रिया में वह अपना कुछ हिस्सा निकालती है लेकिन उसकी मिल्कियत बनी रहती है.

यानी कहा जा सकता है कि विनिवेश किसी कंपनी का आंशिक निजीकरण होता है.

मिसाल के तौर पर मारूति उद्योग लिमिटेड में भारत सरकार और सुज़ुकी मोर्टस की साझा मिल्कियत थी लेकिन अब सरकार ने अपनी हिस्सेदारी बेच दी तो सुज़ुकी मोटर्स के पास 54 प्रतिशत शेयर आ गए और इस तरह मारूति अब एक प्राइवेट कंपनी बन गई.

66विनिवेश की राजनीति
वैसे तो विनिवेश का यह सही समय है पर राजनीति के हिसाब से अनुपयुक्त.
66कार बाज़ार में मार
छोटी कारों के बड़े बाज़ार पर कब्ज़ा जमाने की लड़ाई तेज़ हुई.
66वर्जित निवेशकों के पास शेयर
बीएचईएल के शेयर भारत में वर्जित विदेशी निवेशकों के पास हैं.
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