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वर्जित निवेशकों के कब्ज़े में बीएचईएल? | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वामपंथी नेता दीपांकर मुखर्जी ने आरोप लगाया है कि भारत हेवी इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड यानी बीएचईएल के शेयर एक ऐसे विदेशी संस्थागत निवेशक के कब्ज़े में हैं, जिसका भारत के शेयर बाज़ार में काम करना वर्जित है. सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियन(सीटू) के महासचिव दीपांकर मुखर्ज़ी के अनुसार बीएचईएल के 33 प्रतिशत शेयर विदेशी संस्थागत निवेशकों ने ख़रीद रखे हैं और इसका कुछ हिस्सा यूबीएस सिक्यूरिटीज़ एशिया लिमिटेड नाम का एक वर्जित कंपनी के पास भी है. ये शेयर बीएचईएल के उन 33 प्रतिशत शेयरों का हिस्सा हैं जो भारत सरकार ने 90 के दशक में बेचे हैं. बीएचईएल की वेबसाइट पर भी इसका ज़िक्र है. विभिन्न संस्थाओं द्वारा इन शेयरों के संदर्भ में कहा गया है कि इस साल मार्च तक 23 प्रतिशत से कुछ कम शेयर विदेशी संस्थागत निवेशकों ने ख़रीद रखे हैं. बाकी के 10 प्रतिशत शेयरों में से कुछ तो भारतीय कंपनियों के पास है और बहुत थोड़े से उन कर्मचारियों के पास, जो बीएचईएल में काम कर रहे हैं. इससे पहले यूबीएस एशिया लिमिटेड पिछले दिनों तब चर्चा में आई, जब भारतीय शेयर बाज़ार की देखरेख करनेवाली संस्था, सिक्यूरिटी एंड ऐक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया ने उसपर ग़लत हथकंडे अपनाने का आरोप लगाते हुए उसके कामकाज पर एक वर्ष का प्रतिबंध लगा दिया था. यह फ़ैसला पिछले वर्ष के मई महीने में शेयर बाज़ारों मे अचानक आई मंदी के कारणों की जाँच के बाद लिया गया था जिसमें यूबीएस सिक्योरिटी एशिया लिमिटेड को दोषी पाया गया था. दीपांकर मुखर्जी बताते हैं, "मुझे आशंका है कि इस वर्जित कंपनी और अन्य संस्थागत विदेशी निवेशक कंपनियों का संबंध बीएचईएल की प्रतिद्वंदी, यूरोपीय और अमरीकी कंपनियों से हो सकता है जो धीरे-धीरे बीएचईएल पर अपना कब्ज़ा जमाना चाहती हैं." उन्होंने कहा, "इन कंपनियों के पास लगभग 23 प्रतिशत शेयर तो हैं ही और उन्हें अब तीन प्रतिशत के आसपास शेयर और ख़रीदने हैं. फिर कोई भी कंपनी इस 26 प्रतिशत हिस्से को ख़रीदकर बीएचईएल के प्रबंधन में बहुत सारे अधिकार पा लेगी." मौजूदा कारपोरेट कानूनों के मुताबिक किसी भी कंपनी द्वारा ट्रस्टी संस्था में 26 प्रतिशत शेयर प्राप्त कर लेने से उसे बहुत सारे विशेषाधिकार मिल जाते हैं. प्रतिबद्धता पर सवाल अपने भोपाल दौरे पर गए वामपंथी नेता ने कहा कि यह जाँच करवाने के बजाय कि कहीं इन विदेशी संस्थागत निवेशकों ने ये शेयर बीएचईएल के प्रतिद्वंदियों के लिए तो नहीं ख़रीदे हैं, सरकार भारतीय कंपनी के 10 प्रतिशत शेयर और बेचना चाहती है. ग़ौरतलब है कि केंद्रीय मंत्रीमंडल ने मई के अंतिम सप्ताह में बिजली के भारी उपकरण बनानेवाली इस मुनाफ़े में चल रही कंपनी के 10 प्रतिशत शेयर बेचने का फ़ैसला लिया है. हालांकि वर्तमान केंद्र सरकार ने पहले कहा था कि वह मुनाफ़ा कमा रही कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी को कम नहीं करेगी. विनिवेश का फ़ैसला लेते समय केद्र सरकार ने कहा था कि इस 10 प्रतिशत के बिकने के बाद भी उसके पास कंपनी में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी इससे बीएचईएल प्रबंधन पर सरकार का कब्ज़ा बना रहेगा. दीपांकर मुखर्जी ने बीबीसी को बताया कि वह इस बाबत प्रधानमंत्री को एक-दो दिनों में एक लिखित पत्र के माध्यम से सूचित करने वाले हैं. उन्होंने पूरे मामले की जाँच की भी माँग की है. |
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