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रविवार, 29 जून, 2008 को 08:30 GMT तक के समाचार
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'सरकार आगे बढ़ी तो समर्थन वापस'
प्रकाश करात
परमाणु समझौते के अलावा वामपंथी दल महँगाई को लेकर भी सरकार से नाराज़ हैं
आखिरकार मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने परमाणु करार के मुद्दे पर सरकार के सामने लक्ष्मण रेखा खींच ही दी.

रविवार को पार्टी के पोलित ब्यूरो की दिल्ली में बैठक के बाद स्पष्ट कह दिया गया है कि सरकार ने अगर परमाणु करार पर आगे बढ़ने की ग़लती की तो समर्थन वापस ले लिया जाएगा.

सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वाममोर्चे के प्रमुख घटक सीपीएम ने इस फ़ैसले के साथ ही परमाणु करार पर केंद्र सरकार से किसी भी तरह की रजामंदी की संभावना को विराम लगा दिया है.

हालांकि पार्टी महासचिव प्रकाश कारत ने रविवार की बैठक के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी दूसरे वामपंथी दलों के साथ बात करके ही सरकार से समर्थन खींचेगी.

परमाणु समझौते को लेकर मनमोहन सिंह की अगुवाई वाली केंद्र सरकार के साथ जारी गतिरोध के बीच सीपीएम के पोलित ब्यूरो की रविवार को बैठक हुई.

सीपीएम की केंद्रीय समिति पहले ही परमाणु समझौते के संबंध में ज़रूरी क़दम उठाने का अधिकार पोलित ब्यूरो को सौंप चुकी है.

महंगाई भी मुद्दा

संवाददाता सम्मेलन में महासचिव कारत ने कहा कि केंद्र सरकार महँगाई को रोकने में बुरी तरह से नाकाम रही है जिसके कारण ग़रीब लोगों का जीना मुश्किल हो गया है.

उनका कहना था कि सरकार देश पर छाई भीषण महँगाई को नियंत्रित करने पर ध्यान देने के बदले अमरीकी दबाव में परमाणु समझौते को लागू करने पर तुली हुई है.

उन्होंने कहा कि अगर सरकार परमाणु सुरक्षा समझौते का अनुमोदन कराने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी आईएईए के पास जाती है तो यह सरकार की ओर से वादाख़िलाफ़ी समझा जाएगा.

सीपीएम महासचिव प्रकाश कारत
 हमारी पार्टी का साफ़ तौर पर मानना है कि यह समझौता देश की ऊर्जा सुरक्षा की ज़रूरतों पर ख़रा नहीं उतरता. इस समझौते पर अमल करने से देश की स्वतंत्र विदेश नीति पर असर पड़ेगा और देश की कूटनीतिक स्वायत्तता पर अमरीका की छाप पड़ेगी

उनका कहना था कि सरकार ने वाम-यूपीए समिति को भरोसा दिलाया था कि वह समिति के निष्कर्षों के आधार पर ही आगे क़दम बढ़ाएगी.

कारत ने परमाणु समझौता पर अपना विरोध दोहराते हुए कहा, "हमारी पार्टी का साफ़ तौर पर मानना है कि यह समझौता देश की ऊर्जा सुरक्षा की ज़रूरतों पर ख़रा नहीं उतरता. इस समझौते पर अमल करने से देश की स्वतंत्र विदेश नीति पर असर पड़ेगा और देश की कूटनीतिक स्वायत्तता पर अमरीका की छाप पड़ेगी."

उन्होंने कहा कि यूपीए का गठन सांप्रदायिक ताक़तों को दूर रखने के लिए किया गया था लेकिन इस तरह के क़दम उठाने के जो नतीजे निकलेंगे, उससे यह लक्ष्य धूमिल हो जाएगा.

"सरकार को समझाइए"

उन्होंने गठबंधन में शामिल कांग्रेस के सहयोगी दलों से अपील की है कि वे सरकार को ऐसा कोई क़दम उठाने से रोकें जो सांप्रदायिक ताक़तों को मदद पहुँचाए.

महँगाई के मुद्दे पर कारत ने कहा कि मुद्रास्फीति की दर 11.42 प्रतिशत तक पहुँच गई और सरकार उसे नियंत्रित करने में पूरी तरह विफल साबित हुई है. ऐसे में परमाणु करार के लिए अमरीका से प्रतिबद्धता दिखाना दुर्भाग्यपूर्ण है.

कारत ने कहा है कि उनकी पार्टी दूसरे वामदलों के साथ मिलकर देश भर को यह बताएगी कि सरकार ने न सिर्फ़ परमाणु करार के लिए राष्ट्रहित को क़ुर्बान कर दिया बल्कि वह महँगाई रोकने में भी नाकामयाब रही.

वामदलों की समर्थन वापसी की चेतावनी के बाद सरकार के लिए पैदा होते नज़र आ रहे राजनीतिक संकट में अब सबकी नज़र होगी समाजवादी पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह पर.

मुलायम सिंह ने कहा रखा है कि उनकी पार्टी कोई भी फ़ैसला तीन मई को संयुक्त राष्ट्रीय प्रगतिशील गठबंधन (यूएनपीए) की बैठक के बाद ही करेगी.

निंदनीय विचार
परमाणु करार को धर्म और संप्रदाय से जोड़ने की कोशिश निंदनीय है.
माकपा का झंडानहीं होने देंगे समझौता...
सीपीएम ने कहा है कि परमाणु समझौते पर पार्टी अपने रुख़ पर कायम...
करुणानिधिक़रार पर गतिरोध
परमाणु क़रार पर यूपीए और वामदलों में करुणानिधि मध्यस्थता कर सकते हैं.
प्रणव मुखर्जीसहमति के बाद क़रार
आम सहमति के बिना अमरीका से परमाणु क़रार पर नहीं बढ़ेगा भारत.
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