|
परमाणु मुद्दे पर गतिरोध बरक़रार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत-अमरीका परमाणु सहयोग समझौते के मुद्दे पर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन और वामदलों की बुधवार को हुई बैठक एक बार फिर बिना किसी नतीजे के ख़त्म हो गई. विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने बैठक में भाग लेने के बाद कहा कि अगली बैठक जल्द होगी और उसमे समिति अपनी सिफारिशें रखेगी. विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी और सीपीएम नेता सीताराम यचुरी ने लगभग डेढ घंटे चली बैठक के बाद चार वाक्यों का एक बयान पढा कि दोनों पक्षों ने अपनी अपनी बात रख दी है और इस मसले पर एक और बैठक होगी जिसकी तारीख़ अभी तय नही है. दिल्ली में बीबीसी संवाददाता श्याम सुंदर का कहना है कि इस बैठक के बाद जो कहा गया उससे महत्वपूर्ण वो है जो नहीं कहा गया और जो नहीं कहा गया वो ये की वामपंथी पार्टियों ने एक लिखित नोट सरकार को दे दिया है जिसमें उन्होंने साफ़तौर पर कह दिया है की सरकार अतंरराष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी के साथ क़रार पर हस्ताक्षर ना करे वरना वो सरकार से समर्थन वापस ले लेगें, और इसमे कोई नई बात नही है. जहाँ तक सरकार की बात है उसने वामपंथी पार्टियों को कहा है की भारत अमरिका परमाणु समझौते पर आगे बढने के अलावा कोई विकल्प नही है, हालाँकि इससे पहले वो यूपीए के घटकदलों को ये अहसास कराना चाहती है की उसने वामदलों को साथ रखने की पूरी कोशिश की. वामदलों के साथ बैठक के बाद विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात की और ख़बर है की प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आगामी शुक्रवार को मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई है. भारत अमरीका परमाणु समझौता एक मात्र एसा मुद्दा है जिसको लेकर वामदलों के समर्थन से चल रही यूपीए सरकार पर संकट के बादल बने रहे हैं और अब शायद सरकार का संकट आख़िरी दौर मे पहुँच चुका है. इस मुद्दे पर गेंद अब पूरी तरह से सरकार के पाले मे है और उसकी हालत आगे कुआँ और पीछे खाई वाली है.
अब अगर सरकार समझौते से पीछे हटती है तो ये उसके मुखिया यानी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भारी शर्मिदंगी उठानी पड़ेगी और आगे बढ़ती है तो सरकार के गिरने का संकट है. दूसरी तरफ़ इस दुविधा से बाहर निकलने के लिए सरकार के पास बहुत अधिक समय नही है, क्योंकि अगर वो परमाणु क़रार को बचाना चाहती है तो अगले दो – चार दिन मे उसे फ़ैसला करना ही होगा और जल्दी चुनाव का ख़तरा उठाना होगा. गतिविधियाँ बुधवार की इस अहम बैठक से पहले दिन भर राजनीतिक गतिविधियाँ तेज़ रहीं. बुधवार सुबह विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी और रक्षा मंत्री ऐ के एंटनी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी महासचिव प्रकाश कारत मिले और कुछ रास्ता निकलने के लिए बातचीत की. उसके बाद दोनों नेताओं ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष के अलावा भी कई नेताओं से मुलाकात की. इस मुद्दे पर पैदा हुआ गतिरोध यूपीए के घटक दलों के प्रयासों के बावजूद ख़त्म नहीं हो पाया है. दोनों पक्ष राष्ट्रहित, रणनीतिक प्राथमकिताओं और ऊर्जा की ज़रूरतों की दुहाई दे रहे हैं. जहाँ यूपीए सरकार अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ बातचीत के अंतिम चरण में भाग लेकर भारत का पक्ष रखने को उत्सुक है वहीं वामदल भारत-अमरीका असैनिक परमाणु समझौते के अपने विरोध पर अड़े हुए हैं. पूरा दिन वामदलों ने लगातार कहते रहे कि यदि आईएईए के साथ आगे वार्ता होती है तो वे यूपीए सरकार को बाहर से दिया गया अपना समर्थन वापस ले लेंगे. दूसरी ओर अमरीका लगातार कहता आ रहा है कि यदि भारत इस समझौते को अंजाम तक पहुँचाना चाहता है तो उसके लिए समय कम ही है. भारत में अमरीकी राजदूत डेविड मलफ़ोर्ड प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री पृथ्वीराज चाव्हाण से मिले. मन जा रहा है की प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस करार पर अपना रुख़ बदलने तैयार नहीं. दूसरी तरफ़ वाम दलों का रवैया भी बदलता नज़र नहीं आ रहा. कांग्रेस और घटक दलों के बीच सबसे बड़ी समस्या इन दो विरोधी पक्षों के बीच किसी भी तरह से कोई भी रास्ता निकालने की है. वाम दलों और प्रधानमंत्री को छोड़ कर कोई भी इस मुद्दे पर इस समय सरकार को कुर्बान नहीं करना चाहता. 'समझौता भी, वामदलों का साथ भी' यूपीए में कांग्रेस के सहयोगी दलों - राष्ट्रीय जनता दल और द्रविड़ मुनेत्र कषगम यानी डीएमके ने जहाँ कहा है कि भारत-अमरीका असैनिक परमाणु संधि देश के हित में है. वहीं वे ये भी कह रहे हैं कि वे चुनाव निकट होने की परिस्थिति में वामदलों को साथ लेकर चलना चाहते हैं.
हालांकि आज की बैठक में शरद पवार शामिल नहीं थे पर इस संकट की शुरुआत से ही मराठा नेता यू पी ऐ और वाम दलों के बीच रास्ता निकलने के लिए सक्रिय हैं. सीताराम येचुरी ने बैठक के बाद कहा कि अगली बैठक की तारीख़ सारे नेताओं से बातचीत करने के बाद घोषित की जाएगी और सारे समिति के सदस्य नेता उसमे उपस्थित होंगे. संकट के इस दौर में पिछले कुछ रोज़ में शरद पवार सहित यूपीए के नेताओं लालू प्रसाद यादव और करुणानिधि जैसे नेताओं ने वामपंथी दलों के नेताओं के के साथ कई बैठकें कीं. ये नेता अलग से यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी मिले. ग़ौरतलब है कि बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) पहले ही सरकार से समर्थन वापस ले चुकी है. भले सरकार को इससे तत्काल कोई ख़तरा नहीं है लेकिन वामदलों की धमकी को देखते हुए यूपीए सरकार की स्थिरता पर सवाल खड़े हो गए हैं. उधर हाल में कांग्रेस के क़रीब आई समाजवादी पार्टी ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं. मुलायम का रुख़ समाजवादी पार्टी नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने कहा है कि वे संयुक्त राष्ट्रीय प्रगतिशील गठबंधन (यूएनपीए) के नेताओं से तीन जुलाई को बातचीत करेंगे और उसके बाद ही भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर कोई आख़िरी फ़ैसला करेंगे.
तेज़ी से चलते घटनाचक्र के बीच समाजवादी पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने भी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश कारत से मुलाकात की. यूएनपीए में समाजवादी पार्टी, तेलुगू देशम पार्टी, इंडियन नेशनल लोकदल और असम गण परिषद शामिल हैं. कुछ अन्य दल भी पहले इस गठबंधन में शामिल थे लेकिन अब वे यूएनपीए के साथ हैं या नहीं इस पर उनका रुख़ स्पष्ट नहीं है. समाजवादी पार्टी नेता अमर सिंह कह चुके हैं कि रातों-रात इस मुद्दे पर उनकी पार्टी अपना रुख़ बदल नहीं सकती क्योंकि सरकार ने ऐसे कोई नए तथ्य नहीं रखे हैं जिनके कारण पार्टी परिवर्तन करना ज़रूरी समझे. बैठक के पहले वाममोर्चा के घटक फ़ॉरवर्ड ब्लॉक ने बुधवार को हो रही बैठक से पहले धमकी दी थी कि अगर इस बैठक से कोई ठोस बात सामने नहीं आई तो वह यूपीए और वामदलों की इस समिति में बने रहने पर विचार करेगा. बैठक के बाद अब तक फ़ॉरवर्ड ब्लॉक की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. वाममोर्चा का एक घटक रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) पहले ही बैठकों के बावजूद मसले पर प्रगति न होने के कारण इस समिति से बाहर आ चुका है. |
इससे जुड़ी ख़बरें टूटा नहीं है परमाणु समझौते पर गतिरोध22 जून, 2008 | भारत और पड़ोस परमाणु गतिरोध पर मुलाक़ातों का दौर20 जून, 2008 | भारत और पड़ोस परमाणु करार पर संकट बरकरार20 जून, 2008 | भारत और पड़ोस यूपीए-वाम दलों की बैठक 28 को फिर06 मई, 2008 | भारत और पड़ोस यूपीए-वाम बैठक अब 25 जून को18 जून, 2008 | भारत और पड़ोस यूपीए समन्वय समिति से हटी आरएसपी02 जून, 2008 | भारत और पड़ोस समझौते पर यूपीए-वामदलों की बैठक टली27 मई, 2008 | भारत और पड़ोस समझौते पर यूपीए-वाम दलों की बैठक06 मई, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||