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आडवाणी के बयान पर कांग्रेस की आपत्ति | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लोकसभा में विश्वास मत लाने की मांग करने पर कांग्रेस पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी के नेता लालकृष्ण आडवाणी की कड़ी आलोचना की है. विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम पर कड़ा रुख़ अपनाते हुए कहा था कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार लोकसभा में तुरंत विश्वास मत हासिल करे. लेकिन कांग्रेस ने इस बयान पर आपत्ति जताई है. पार्टी प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा, "अभी तक किसी ने भी सरकार से समर्थन वापस नहीं लिया है. इसलिए विश्वास मत का सवाल ही कहाँ पैदा होता है." उन्होंने कहा कि ऐसे समय जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी-8 सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए जापान जा रहे हैं, आडवाणी ग़ैर ज़िम्मेदाराना बयान दे रहे हैं. कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, "आडवाणी अपनी मांगों से अस्थिरता क्यों पैदा कर रहे हैं. सरकार अस्थिर नहीं है. अगर कोई अस्थिरता है तो वो विपक्ष के नेता के दिमाग़ में है." मुश्किल पिछले कुछ महीनों से अमरीका के साथ परमाणु समझौते का मामला सरकार के लिए गले की हड्डी बन गया था. वामदलों के विरोध के कारण केंद्र सरकार चाहकर भी समझौते पर आगे नहीं बढ़ पाई थी. यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वाममोर्चे ने इस मुद्दे पर अपना रुख़ स्पष्ट करने के लिए सरकार के सामने सात जुलाई तक की समयसीमा रखी है. परमाणु समझौते पर समर्थन के लिए यूपीए और समाजवादी पार्टी में नज़दीकी बढ़ी है और इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी ने समर्थन का वादा भी किया है. इन सब राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच शनिवार को लालकृष्ण आडवाणी ने एक संवाददाता सम्मेलन में मांग की कि केंद्र सरकार लोकसभा में अपना बहुमत साबित करे. मांग लालकृष्ण आडवाणी का कहना था कि अपने आचरण के कारण तो मनमोहन सरकार शासन चलाने का नैतिक अधिकार खो ही चुकी है और अब उसे ये सिद्ध करना है कि सदन में उसके पास शासन चलाने के लिए पर्याप्त संख्या है.
आडवाणी ने कहा, "वैसे तो संसद का सत्र अगस्त में होना है लेकिन जो राजनीतिक अनिश्चितता चल रही है, उसे देखते हुए हम मांग करते हैं कि संसद का सत्र तत्काल बुलाया जाए और मनमोहन सिंह लोकसभा में बहुमत साबित करें. उन्हें लोकसभा में विश्वास मत हासिल करने के लिए प्रस्ताव रखना चाहिए." विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया कि पिछले एक हफ़्ते से सरकार और शासन को जैसे लकवा मार गया है और जहाँ भाजपा अगले चुनाव की तैयारी में लगी है वहाँ सरकार केवल ख़ुद को बचाने में जुटी हुई है. दूसरी ओर परमाणु समझौते के मुद्दे पर कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि यह मुद्दा देश के लिए काफ़ी अहम है. राजनीतिक मौक़ापरस्ती के आरोप को ख़ारिज़ करते हुए मनीष तिवारी ने कहा, "परमाणु समझौते का मुद्दा देश के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे देश को ऊर्जा मिलेगी. जो भी पार्टी इसका समर्थन करेगी, हम उसका स्वागत करेंगे." लेकिन लालकृष्ण आडवाणी ने आरोप लगाया कि सरकार अपने को बचाने के लिए सौदेबाज़ी कर रही है. |
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