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सरकार को सात जुलाई तक का समय | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में संयुक्त प्रगतिशील गंठबंधन सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामदलों ने सरकार से कहा है कि वह सात जुलाई तक बताए कि क्या वह भारत-अमरीका परमाणु मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी से अंतिम चरण की वार्ता करने जा रही है? यूपीए गठबंधन सरकार लोकसभा में बहुमत के लिए वामदलों के 59 सांसदों और केरल कांग्रेस के दो अन्य सांसदों के समर्थन पर निर्भर है. वामदलों के समर्थन वापस लेने की स्थिति में यूपीए की सरकार अल्पमत में आ जाएगी. वामदल पहले ही सरकार को चेतावनी दे चुके हैं कि यदि सरकार आईएईए के साथ भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर अंतिम दौर की बातचीत के लिए आगे बढ़ती है तो वे सरकार से समर्थन वापस ले लेंगे. वामदलों का मानना है कि भारत-अमरीका परमाणु करार भारत के हितों से समझौता है. वे लगातार इस समझौते का विरोध करते आए हैं और कहते रहे हैं कि इस समझौते से भारत की निष्पक्ष और स्वतंत्र विदेश नीति को धक्का लगेगा और अमरीका का भारत की परमाणु नीति पर अनुचित प्रभाव कायम हो जाएगा.
उधर भारत के विदेश सचिव शिवशंकर मेनन ने कहा है कि भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बुधवार से टोक्यो में शुरु हो रहे जी-8 सम्मेलन के दौरान अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से मिलेंगे. पर्यवेक्षकों का मानना है कि वहाँ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह राष्ट्रपति बुश को बता सकते हैं कि भारत ने परमाणु समझौते के मुद्दे पर देश में विरोध के बावजूद आगे बढ़ने का फ़ैसला किया है. जनता को जागरूक करेंगे गुरुवार को वामदलों की बैठक के बाद मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश कारत ने संवाददाताओं के बताया कि दो अहम निर्णय लिए गए हैं. उनका कहना था, "वामदलों ने वरिष्ठ मंत्री प्रणव मुखर्जी को पत्र लिखकर कहा है कि सत्ताधारी गठबंधन की ओर से कई तरह के बयान आ रहे हैं जिनमें कहा जा रहा है कि सरकार भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर आगे बढ़ रही है." चेतावनी भरे अंदाज़ में प्रकाश कारत ने कहा, "हम जानना चाहते हैं कि क्या सरकार अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ वार्ता के लिए आगे बढ़ रही है. हमें अपने विचारों से सात जुलाई, 2008 तक अनिवार्य तौर पर अवगत कराएँ." प्रकाश कारत ने कहा कि वामदलों ने जनता के पास जाकर उसे जागरूक करने का दूसरा निर्णय लिया है. उनका कहना था, "चौदह जुलाई से वामदल राष्ट्रव्यापी अभियान चलाएँगे और जनता के पास जाकर उसे जागरूक करेंगे कि वामदल परमाणु समझौते का विरोध क्यों कर रहे हैं. साथ ही, महँगाई और अन्य संबंधित मुद्दों और सरकार की नीतियों के बारे में भी जनता को जानकारी दी जाएगी." काफ़ी देर से तीख़े तेवर इस बैठक से पहले ही वामदलों ने लगभग ये तय मान लिया था कि यूपीए सरकार उनकी धमकियों के कारण परमाणु समझौते पर आगे चलने से बाज़ आने वाली नहीं है. उधर यूपीए सरकार भी वामपंथी दलों के समर्थन वापसी की परिस्थितियों में सरकार बचाने के लिए ज़रुरी संख्या जुटाने की कवायद में जुटी हुई है और यूपीए नेताओं का समाजवादी पार्टी के नेताओं से बातचीत का दौर जारी है. गुरुवार को वाममोर्चे के तीन दलों भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई), आरएसपी और फॉर्वर्ड ब्लॉक ने एक बैठक की थी. इस बैठक के बाद सीपीआई के महासचिव एबी बर्धन ने स्पष्ट संकेत देते हुए कहा था, "हम शुक्रवार को सरकार से यह स्पष्ट करने की माँग करेंगे कि वह कब आईएईए के पास जा रही है. " |
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