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गुरुवार, 03 जुलाई, 2008 को 11:48 GMT तक के समाचार
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राष्ट्रीय बहस नहीं तो समर्थन नहीं: यूएनपीए
यूएनपीए
यदि वामदल यूपीए सरकार से समर्थन वापस लेते हैं तो समाजवादी पार्टी सरकार को बचा सकती है
भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर भारतीय राजनीति के तीसरे मोर्चे यानी यूनाइटेड नेशनल प्रोग्रेसिव एलायंस (यूएनपीए) ने घोषणा की है कि जब तक केंद्र सरकार इस मुद्दे पर राष्ट्रीय बहस नहीं कराती तब तक उसे इस मसले पर यूएनपीए का समर्थन नहीं मिलेगा.

यूएनपीए के नेताओं ने एक मंच से घोषणा की कि गठबंधन के सभी दल एकजुट हैं. मीडिया में अटकलें लगाई जा रही थीं कि वामदलों की समर्थन वापसी की धमकी का सामना कर रही यूपीए सरकार को संभवत: गुरुवार को यूएनपीए की 39 सांसदों वाली समाजवादी पार्टी का समर्थन मिल सकता है. लेकिन समाजवादी पार्टी ने यूएनपीए के अन्य दलों के साथ परमाणु मुद्दे पर राष्ट्रीय बहस की माँग रख डाली.

 छह जुलाई से पहले तो बिलकुल नहीं...और हमसे लिखवा लीजिए, यदि इस मुद्दे पर राष्ट्रीय बहस नहीं होती है तो यूपीए को हमारा समर्थन नहीं मिलेगा
ओम प्रकाश चौटाला

यूएनपीए में समाजवादी पार्टी (39 सांसद), तेलुगु देशम (पाँच सांसद), असम गण परिषद (दो सांसद) और नेशनल कॉन्फ़्रेस (दो सांसद) शामिल हैं. लोकसभा की 545 सीटों में से दो रिक्त हैं जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए और सहयोगियों के लगभग 228 सांसद और वामदलों के 61 सांसद हैं.

यूएनपीए की तीन घंटे की बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में इस गठबंधन के नेता - मुलायम सिंह यादव, अमर सिंह, चंद्र बाबू नायडू और ओम प्रकाश चौटाला ने बारी बारी से संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया. ये भी घोषणी की गई कि नेशनल कॉन्फ़्रेंस के फ़ारूख़ अब्दुल्ला जम्मू में बंद के कारण बैठक में शामिल नहीं हो पाए लेकिन उन्होंने यूएनपीए के साथ सहमति जताई है.

हालाँकि पर्यवेक्षकों का मानना है कि यूएनपीए के नेता यूपीए के साथ परमाणु मुद्दे पर चर्चा और इस मुद्दे पर पुख़्ता मन बनाने के लिए गुरुवार की घोषणा के ज़रिए और समय ले रहे हैं.

'विश्वासपात्र परमाणु विशेषज्ञ'

काफ़ी तनावपूर्ण मुद्र में दिखाई देते समाजवादी पार्टी महासचिव अमर सिंह ने कहा, "परमाणु मुद्दे पर हमारी आशंकाओं पर प्रधानमंत्री की ओर से जवाब आ गया है. हम चाहते हैं कि जनता और राजनीतिक दलों का विश्वासपात्र कोई परमाणु विशेषज्ञ इस मुद्दे का विश्लेषण करे और सभी के सामने अपने विचार रखे. ऐसे व्यक्ति का चयन मुलायम सिंह करेंगे."

सपा और यूपीए के बीच कई दौर की बातचीत हुई है

अमर सिंह और इंडियन नेशनल लोक दल के नेता ओम प्रकाश चौटाला ने महँगाई, कृषि, तेल की बढ़ती कीमतों के मुद्दों का भी ज़िक्र किया और कहा कि 'इन कारणों से कष्ट भोग रही जनता के हितों के साथ समझौता नहीं किया जाएगा.'

'छह जुलाई से पहले नहीं'

जब इन नेताओं से स्पष्ट पूछा गया कि क्या वे इस मुद्दे पर यूपीए सरकार को समर्थन देंगे तो ओम प्रकाश चौटाला ने काफ़ी बेबाक बात करते हुए कहा, "छह जुलाई से पहले तो बिलकुल नहीं...और हमसे लिखवा लीजिए, यदि इस मुद्दे पर राष्ट्रीय बहस नहीं होती है तो यूपीए को हमारा समर्थन नहीं मिलेगा."

इस संवाददाता सम्मेलन में ओम प्रकाश चौटाल ने एक रोचक टिप्पणी करते हुए कहा कि जनता कई नातियों के कारण कष्ट झेल रही है यूएनपीए ने ख़ुद को एक तीसरे विकल्प की तरह सामने पेश किया है.

 फ़िलहाल वामदल ही कांग्रेस से अलग नहीं हुए हैं...जब होंगे तो देखा जाएगा. हम चाहते हैं कि जनता और राजनीतिक दलों का विश्वासपात्र कोई परमाणु विशेषज्ञ इस मुद्दे का विश्लेषण करे और सभी के सामने अपने विचार रखे. ऐसे व्यक्ति का चयन मुलायम सिंह करेंगे
अमर सिंह

उनका ये भी कहना था - 'जो पार्टियाँ अब सत्ता में हैं, यदि वे साथ नहीं चल सकतीं, तो उन्हें यूएनपीए को समर्थन देना होगा.'

जब अमर सिंह से वामदलों के समर्थन वापस लेने और समाजवादी पार्टी के यूपीए को समर्थन देने के बारे में स्पष्ट पूछा गया तो वे बोले, "फ़िलहाल वामदल ही कांग्रेस से अलग नहीं हुए हैं...जब होंगे तो देखा जाएगा. "

कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सांठगाठ को मीडिया की अटकलें बताते हुए अमर सिंह ने कहा - "राजनीतिक नेता सभी से मिलते हैं. यदि ज़रूरी हुआ तो हम प्रधानमंत्री से दस बार मिलेंगे, सोनिया गांधी से भी मिलेंगे...अन्य दलों से मिलने के मतलब ये नहीं है कि हमारा अस्तित्व ख़त्म हो जाएगा."

कांग्रेस'हमें कोई ख़तरा नहीं'
कांग्रेस ने कहा कि वामदल समर्थन वापस ले भी लें तो यूपीए को कोई ख़तरा नहीं.
प्रणव मुखर्जीसहमति के बाद क़रार
आम सहमति के बिना अमरीका से परमाणु क़रार पर नहीं बढ़ेगा भारत.
करुणानिधिक़रार पर गतिरोध
परमाणु क़रार पर यूपीए और वामदलों में करुणानिधि मध्यस्थता कर सकते हैं.
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