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बुधवार, 02 जुलाई, 2008 को 18:49 GMT तक के समाचार
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'समझौते का विदेश नीति पर असर नहीं'
मनमोहन सिंह
मनमोहन सिंह ने दोहराया है कि इससे भारत की संप्रभुता पर कोई असर नहीं होगा
अमरीका के साथ परमाणु सहयोग के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के सवालों पर सफ़ाई देते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा है कि इसका भारत की विदेश नीति पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

प्रधानमंत्री कार्यालय में एक विस्तृत बयान जारी करते हुए कहा है कि न तो इससे भारत-ईरान संबंधों पर असर होगा और न भारत की सामरिक नीति प्रभावित होगी.

साथ ही प्रधानमंत्री कार्यालय ने दोहराया है कि 123 समझौता सर्वोपरि होगा न कि हाईड एक्ट और भारत की परमाणु परीक्षण की स्वतंत्रता पर भी कोई आँच नहीं आएगी.

उल्लेखनीय है कि समाजवादी पार्टी के नेताओं ने बुधवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन से मुलाक़ात की थी और अपनी ओर से कुछ सवाल सरकार से पूछे थे.

हालांकि इस बातचीत के बाद गहराती राजनीतिक अनिश्चतता के बीच भी समाजवादी पार्टी ने सत्ताधारी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन को समर्थन देने के मामले पर कोई ठोस बात नहीं की थी.

इसके बाद उनके सवालों का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है.

'कोई रोक नहीं'

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अमरीका के साथ परमाणु समझौते का भारत की विदेश नीति पर कोई असर नहीं हुआ है और न आगे ऐसा होने की संभावना है.

बयान में कहा गया है कि भारत ने अपनी सामरिक स्वायत्तता को हमेशा सर्वोपरि रखा है और वह इस समझौते से प्रभावित नहीं होगी.

बिंदुबार जवाब देते हुए बयान में कहा गया है कि भारत किसी तरह के दबाव में नहीं है और इस समझौते के चलते भारत और ईरान के संबंधों पर कोई असर नहीं होने वाला है.

समाजवादी पार्टी के नेताओं के सवालों का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के हवाले से कहा गया है कि समझौता भारत के परमाणुविक संप्रभुता पर कोई असर नहीं डालेगा क्योंकि यह असैन्य परमाणु समझौता है.

प्रधानमंत्री कार्यालय ने स्पष्ट कहा है कि भारत अपनी ज़रुरत के मुताबिक़ परमाणु परीक्षण भी कर सकेगा.

वामपंथी दलों की इस आशंका का खंडन भी बयान में किया गया है कि समझौते के बाद हाइड एक्ट का असर भारत पर पड़ेगा.

बयान में कहा गया है कि 123 समझौता हमेशा हाइट एक्ट से ऊपर रहेगा.

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ संभावित समझौते पर प्रधानमंत्री की ओर से स्पष्ट किया गया है कि इससे भारत के परमाणु कार्यक्रम और तकनीक के विकास पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

सवाल

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से बुधवार को अमर सिंह और रामगोपाल यादव की मुलाक़ात हुई थी.

इसके बाद अमर सिंह ने एक पत्रकारवार्ता में कई सवाल खड़े किए थे.

अमर सिंह
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से मुलाक़ात के बाद अमर सिंह ने प्रधानमंत्री से स्पष्टीकरण की माँग की थी

अमर सिंह से पूछा गया कि बुधवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से हुई बातचीत से वे कितने संतुष्ट हैं तो इसके जवाब में उन्होंने कहा, "सवाल ये है कि समाजवादी पार्टी अकेली नहीं है, हम यूएनपीए के साथ है, कल (गुरुवार को) हम यूएनपीए की बैठक में अपनी बात कहेंगे, हम अपने गठबंधन के साझीदारों से पत्रकारों के माध्यम से बात करना उचित नहीं समझते".

समाजवादी पार्टी की ओर से इतना ही कहा गया कि उनका मुख्य लक्ष्य "सांप्रदायिक शक्तियों को सत्ता में आने से रोकना है."

अमर सिंह के संवाददाता सम्मेलन में मौजूद बीबीसी संवाददाता श्याम सुंदर का कहना है कि "बंद कमरों में जो बातें हुई हैं वो प्रेस कॉन्फ्रेंस में कभी नहीं बताई जातीं लेकिन ऐसा लग रहा है कि काँग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सहमति बन गई है कि अगर वामपंथी अविश्वास प्रस्ताव लाते हैं तो वे सरकार को बचा लेंगे".

अमर सिंह ने इन सवालों का कोई सीधा जवाब नहीं दिया कि अगर वामपंथी पार्टियाँ केंद्र सरकार से समर्थन वापस लेती हैं तो क्या वे सरकार को बचाने के लिए उसे समर्थन देने को तैयार हैं.

समाजवादी पार्टी के महासचिव अमर सिंह ने कहा कि यह सवाल अभी प्रासंगिक नहीं है क्योंकि वामपंथी पार्टियों ने समर्थन वापस नहीं लिया है इसलिए उसे बचाने का सवाल नहीं उठता.

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के साथ एक घंटे तक हुई बातचीत का उन्होंने कोई ब्योरा नहीं दिया, इससे पहले उन्होंने विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी से भी मुलाक़ात की थी.

वामपंथी पार्टियों ने सरकार को धमकी दी है कि अगर सरकार अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) में जाती है तो वह समर्थन वापस ले लेगी.

प्रतिक्रियाएँ

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बीबीसी से बातचीत में इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि "अगर सरकार आईएईए में जाती है तो हम अपना समर्थन वापस लेने के रुख़ पर क़ायम हैं".

 यह दरअसल उत्तर प्रदेश की राजनीति है, समाजवादी पार्टी राज्य में मायावती से परेशान है. उनके ख़िलाफ़ कई मामले हैं, सीबीआई के मामले भी हैं. वे इन मामलों से बचने और मायावती से निबटने के लिए केंद्र सरकार को समर्थन देना चाहते हैं
रविशंकर प्रसाद, भाजपा नेता

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री रविशंकर प्रसाद का कहना है कि समाजवादी पार्टी अपनी 'संकीर्ण राजनीति' के आधार पर यूपीए को समर्थन देने की ओर बढ़ रही है.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, "यह दरअसल उत्तर प्रदेश की राजनीति है, समाजवादी पार्टी राज्य में मायावती से परेशान है. उनके ख़िलाफ़ कई मामले हैं, सीबीआई के मामले भी हैं. वे इन मामलों से बचने और मायावती से निबटने के लिए केंद्र सरकार को समर्थन देना चाहते हैं."

रविशंकर प्रसाद कहते हैं, "आपको याद होगा कि समाजवादी पार्टी ने बुश की भारत यात्रा का कैसा कड़ा विरोध किया था, उनके रुख़ में इतने बड़े परिवर्तन की कुछ तो वजह होगी. यूपीए एक स्वार्थपरक गठबंधन है जिसमें लोग अपने स्वार्थ से आते और जाते रहते हैं".

कांग्रेस'हमें कोई ख़तरा नहीं'
कांग्रेस ने कहा कि वामदल समर्थन वापस ले भी लें तो यूपीए को कोई ख़तरा नहीं.
प्रणव मुखर्जीसहमति के बाद क़रार
आम सहमति के बिना अमरीका से परमाणु क़रार पर नहीं बढ़ेगा भारत.
करुणानिधिक़रार पर गतिरोध
परमाणु क़रार पर यूपीए और वामदलों में करुणानिधि मध्यस्थता कर सकते हैं.
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