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सपा ने दिया करार को 'समर्थन' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर वामदलों के केंद्र सरकार से समर्थन वापस लेने की धमकी और सात जुलाई तक परमाणु समझौते पर उनके पत्र का जवाब देने की 'डेडलाइन' से भारतीय राजनीति गरमाई है. वामदलों के अपने 59 सांसदों का समर्थन यूपीए सरकार से वापस लेने की परिस्थिति में कांग्रेस को उम्मीद है कि यदि सरकार को समाजवादी पार्टी के 39 सांसदों और कुछ अन्य सांसदों की ओर से समर्थन मिल जाता है तो वह लोकसभा में बहुमत कायम रख सकेगी. गुरुवार को समाजवादी पार्टी के नेता पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से और फिर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिले और उनसे मिलने के बाद उन्होंने कहा कि परमाणु मुद्दे पर उनकी शंकाओं पर प्रधानमंत्री कार्यालय से जो जवाब आया है 'वह काफ़ी संतोषजनक' है. उधर वरिष्ठ कांग्रेस नेता वीरप्पा मोइली ने एक भारतीय टीवी चैनल को बताया, "समाजवादी पार्टी ने देश के हित में निर्णय लिया है. उन्होंने परमाणु समझौते के बारे में समर्थन व्यक्त किया है. हाँ, अब हमारे पास पर्याप्त संख्या है...लेकिन जहाँ तक अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी में जाने का फ़ैसला है...वह समय आने पर लिया जाएगा." उनका कहना था कि प्रधानमंत्री के साथ बातचीत में मुलायम सिंह ने परमाणु समझौते के बारे में समर्थन व्यक्त किया और फिर सोनिया गांधी के साथ मुलाक़ात में भी ऐसा ही किया है. उधर कांग्रेस के 'कोर ग्रुप' यानि वरिष्ठ मंत्रियों और पार्टी के पदाधिकारियों की भी सोनिया गांधी से शुक्रवार सुबह बातचीत हुई है और संभावना जताई जा रही है कि सोमवार तक स्थिति स्पष्ट हो सकती है. 'फ़िलहाल कोई प्रतिबद्धता नहीं'
शुक्रवार सुबह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ चर्चा के बाद समाजवादी पार्टी महासचिव अमर सिंह से पूछा गया कि क्या उन्होंने यूपीए को समर्थन देने पर कोई बात की है? उनका कहना था, "हमने अपने विचारों से प्रधानमंत्री को अवगत कराया है और सोनिया गांधी को भी करा रहे हैं. इसके बाद हम यूएनपीए के नेताओं से चर्चा करेंगे. हम कुछ भी छिपा कर नहीं कर रहे और यूएनपीए के कनवीनर चंद्रबाबू नायडू को इस बारे में पूरी जानकारी है." मुलायम सिंह ने कहा, "हमें बताया गया है कि परमाणु समझौते से भारत को न कोई ख़तरा है और न ही सरकार पर इस बारे में कोई दबाव है. प्रधानमंत्री से उन सभी मुद्दों पर बात हुई जिनके बारे में यूएनपीए ने चिंता जताई थी और अब इस चर्चा की जानकारी भी यूएनपीए के नेताओं को दी जाएगी. हमारी सबसे पहली प्राथमिकता राष्ट्रीय हित है." जहाँ दिन-प्रतिदिन परमाणु मुद्दे पर समाजवादी का रुख़ नरम पड़ता प्रतीत हो रहा है वहीं पर्यवेक्षक समाजवादी पार्टी की गतिविधियों पर कई सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है कि जब यूएनपीए की बैठक में किसी निष्पक्ष और सभी के विश्वास प्राप्त वैज्ञानिक से चर्चा करने की बात हुई थी तो पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम से बात करने की क्या ज़रूरत थी क्योंकि उनके विचार तो इस मुद्दे पर पहले ही जग-ज़ाहिर हैं. पूर्व राष्ट्रपति कलाम से बातचीत पर समाजवादी पार्टी नेता अमर सिंह ने कहा, "पूर्व राष्ट्रपति कलाम ने स्पष्ट किया है कि समझौते से हमारी संप्रभुता को कोई ख़तरा नहीं. ये परमाणु तकनीक ऊर्जा, कृषि और अनेक अन्य क्षेत्रों में लाभदायक है क्योंकि थोरियाम का इस्तेमाल कर पाने में हमें काफ़ी समय लगेगा. हमारे नेता ने स्पष्ट किया है कि वे यूएनपीए के नेताओं के इस बारे में बताएँगे." राष्ट्रीय बहस का सवाल गुरुवार को भारतीय राजनीति के तीसरे मोर्चे यानी यूनाइटेड नेशनल प्रोग्रेसिव एलायंस (यूएनपीए) ने घोषणा की थी कि जब तक केंद्र सरकार परमाणु मुद्दे पर राष्ट्रीय बहस नहीं कराती तब तक उसे इस मसले पर यूएनपीए का समर्थन नहीं मिलेगा. यूएनपीए में समाजवादी पार्टी (39 सांसद), तेलुगु देशम (पाँच सांसद), असम गण परिषद (दो सांसद) और नेशनल कॉन्फ़्रेस (दो सांसद) शामिल हैं. लोकसभा की 545 सीटों में से दो रिक्त हैं जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए और सहयोगियों के लगभग 228 सांसद और वामदलों के 61 सांसद हैं. यदि वामदल यूपीए गठबंधन सरकार से समर्थन वापस लेते हैं तो सरकार के लिए समाजवादी पार्टी और कुछ छोटे दलों का समर्थन लेना अनिवार्य हो सकता है. |
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