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शनिवार, 05 जुलाई, 2008 को 07:15 GMT तक के समाचार
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'मनमोहन सरकार विश्वास मत प्राप्त करे'
लालकृष्ण आडवाणी (फ़ाइल फ़ोटो)
सब व्यवहारिक मक़सदों के लिए मनमोहन सरकार बहुमत खो चुकी है: आडवाणी
भारत में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार पर तीख़े प्रहार करते हुए कहा है तत्काल संसद का सत्र बुलाया जाए और मनमोहन सिंह सरकार लोकसभा में बहुमत साबित करे.

पिछले एक हफ़्ते के राजनीतिक घटनाक्रम पर कड़ा रुख़ अपनाते हुए भारतीय जनता पार्टी के नेता आडवाणी ने दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "सब व्यवहारिक मक़सदों के लिए मनमोहन सिंह सरकार लोकसभा में बहुमत खो चुकी है."

उधर कांग्रेस ने भाजपा की इस माँग जैसे ख़ारिज ही कर दिया. कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, "विभिन्न दल इस मुद्दे पर एकजुट होने के प्रयास कर रहे हैं और भाजपा जैसे अवसरवादी नीति नहीं अपना रहे. आडवाणी जी संवैधानिक क़ानून भूल गए हैं. यदि वे अविश्वास प्रस्ताव लाना चाहते हैं तो कभी भी ला सकते हैं."

 वैसे तो संसद का सत्र अगस्त में होना है लेकिन जो राजनीतिक अनिश्चितता चल रही है, उसे देखते हुए हम माँग करते हैं कि संसद का सत्र तत्काल बुलाया जाए और मनमोहन सिंह लोकसभा में बहुमत साबित करें. उन्हें लोकसभा में विश्वास मत हासिल करने के लिए प्रस्ताव रखना चाहिए
लालकृष्ण आडवाणी

आडवाणी के साथ संवाददाता सम्मेलन में शामिल पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह ने कहा कि महँगाई बढ़ती ही जा रही है और यदि स्थिति इसी तरह से बनी रही तो इस बात का ख़तरा है कि देश में आर्थिक इमरजेंसी लगाने की नौबत आ सकती है.

'तत्काल सत्र बुलाएँ'

लालकृष्ण आडवाणी का कहना था कि अपने आचरण के कारण तो मनमोहन सरकार शासन चलाने का नैतिक अधिकार खो ही चुकी है और अब उसे ये सिद्ध करना है कि सदन में उसके पास शासन चलाने के लिए पर्याप्त संख्या है.

आडवाणी ने ज़ोर देकर कहा, "वैसे तो संसद का सत्र अगस्त में होना है लेकिन जो राजनीतिक अनिश्चितता चल रही है, उसे देखते हुए हम माँग करते हैं कि संसद का सत्र तत्काल बुलाया जाए और मनमोहन सिंह लोकसभा में बहुमत साबित करें. उन्हें लोकसभा में विश्वास मत हासिल करने के लिए प्रस्ताव रखना चाहिए."

विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया कि पिछले एक हफ़्ते से सरकार और शासन को जैसे लकवा मार गया है और जहाँ भाजपा अगले चुनाव की तैयारी में लगी है वहाँ सरकार केवल ख़ुद को बचाने में जुटी हुई है.

 विभिन्न दल इस मुद्दे पर एकजुट होने के प्रयास कर रहे हैं और भाजपा जैसे अवसरवादी नीति नहीं अपना रहे. आडवाणी जी संवैधानिक क़ानून भूल गए हैं. यदि वे अविश्वास प्रस्ताव लाना चाहते हैं तो कभी भी ला सकते हैं
कांग्रेस प्रवक्ता

उनका कहना था, "सरकार ख़ुद को बचाने के लिए कुछ भी सौदेबाज़ी करने में लगी हुई है."

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने जनता की नज़र में अपनी विश्वसनीयता खो दी है.

आडवाणी का कहना था कि पहले दुश्मन रही दो पार्टियाँ अब ऐसे प्रयास कर रही हैं कि किस तरह की सौदेबाज़ी से सहयोगी दल बना जाए.


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