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उत्तर प्रदेश में बदलता सत्ता समीकरण | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की सरकार से बहुजन समाज पार्टी के समर्थन वापसी और फिर समाजवादी पार्टी के यूपीए को समर्थन देने से जो नए राजनीतिक समीकरण बने हैं उससे अचानक उत्तर प्रदेश में सत्ता का समीकरण बदल गया है. कल तक उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती काफ़ी शक्तिशाली दिख रही थी. यहाँ तक कि उनके प्रधानमंत्री बनने के भी कयास लगाए जा रहे थे. लेकिन अब आय से अधिक संपत्ति के मामले में वे बुरी तरह फंसती दिख रही हैं. कानून के जानकारों का कहना है कि इस बात की संभावना कम ही है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में दायर एफ़आईआर को ख़ारिज करे. लखनऊ स्थित आपराधिक मामलों के एक वरिष्ठ वकील आईबी सिंह कहते हैं, "इस मामले में जाँच सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ही हुई थी. अब सबूतों के साथ सीबीआई चार्जशीट दायर करने को तैयार है. इस स्तर पर यह आश्चर्यजनक होगा यदि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में दायर एफ़आईआर को ख़ारिज करे. इससे पहले ऐसा कोई दृष्टांत नहीं दिखता." आईबी सिंह का कहना है, "भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 के तहत न्याय की प्राप्ति के लिए या किसी न्यायालय की विधि के ग़लत इस्तेमाल को रोकने के लिए उच्च न्यायालय को यह अधिकार है कि एफ़आईआर को ख़ारिज कर दे. लेकिन यह बात इस मामले में लागू नहीं होती." 'आय से अधिक संपत्ति' यह मामला ताज कॉरिडोर के सिलसिले में लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा हुआ है. इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की देख-रेख में ही चल रही थी. मायावती ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इस मामले को ख़ारिज करने की अपील की थी. सुप्रीम कोर्ट ने ही केंद्रीय जाँच आयोग (सीबीआई) से आय से अधिक संपत्ति के मामले में एक अन्य केस दायर करने को कहा था जब उन्हें यह सूचना मिली कि मायावती ने आय के मालूम स्त्रोत से अधिक संपत्ति जमा की है. क़ानून के तहत ट्रायल कोर्ट सीबीआई की चार्जशीट की जाँच कर सकता है. इस बात की संभावना व्यक्त की जा रही है कि सीबीआई लखनऊ के ट्रायल कोर्ट में चार्जशीट दायर करेगी. सामान्य कार्रवाई जब लालू यादव पर आय से अधिक संपत्ति का मामला चला था तब सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल करने से पहले ही उन्हें गिरफ़्तार कर लिया था. सीबीआई की यह सामान्य कार्रवाई थी.
क़ानून के जानकारों का कहना है कि यदि चार्जशीट दाखिल करने से पहले सीबीआई उन्हें गिरफ़्तार नहीं करती है तो कोर्ट उन्हें समन जारी करेगा. आम तौर से सीबीआई कोर्ट में अभियुक्त के मौजूद रहने के लिए ऐसे वारंट जारी करती है जिसमें ज़मानत नहीं मिले. सरकारी अधिकारियों के मुताबिक यदि इस मामले में ऐसा होता है तो इस सूरत में उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ सकता है क्योंकि पुलिस किसी मुख्यमंत्री को गिरफ़्तार नहीं कर सकती है. बाद में कुछ समय के बाद उन्हें ज़िला या सेशन कोर्ट से ज़मानत मिल सकती है. दूसरी तरफ़ विपक्ष के नेता मुलायम सिंह यादव और उनकी पार्टी के लोग इस बात से राहत महसूस कर रहे हैं कि मायावती ख़ुद की परेशानियों से घिरी हुई हैं. सु्प्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई 28 जुलाई को होनी है तब ही जाकर इस मामले में कुछ स्पष्ट रुप से उभर कर सामने आ पाएगा. सत्ताधारी बहुजन समाज पार्टी के नेताओं को उम्मीद है कि उनकी नेता को किसी तरह से राहत मिल जाएगी. लेकिन जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री मायावती को लालू प्रसाद की ही तरह कोई तत्काल सामाधान ढूँढ़ना पड़ सकता है. लालू प्रसाद ने चारा घोटाले के मामले में जेल जाने से पहले ही राबड़ी देवी को राष्ट्रीय जनता दल की विधायक दल का नेता चुनकर मुख्यमंत्री पद पर बिठाया. | इससे जुड़ी ख़बरें मायावती के ख़िलाफ़ पर्याप्त सबूत:सीबीआई10 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस 'सीबीआई का दुरुपयोग करके साज़िश' 12 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस मायावती ने यूपीए सरकार से हाथ खींचा21 जून, 2008 | भारत और पड़ोस मुलायम नाटकबाज़ी कर रहे हैं: मायावती04 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस 'डील के भीतर कोई डील नहीं है'09 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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