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बुधवार, 09 जुलाई, 2008 को 17:52 GMT तक के समाचार
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'डील के भीतर कोई डील नहीं है'

अमर सिंह
अमर सिंह ने कहा है कि उनकी पार्टी सरकार को बाहर से समर्थन देगी
समाजवादी पार्टी के महासचिव अमर सिंह ने कहा है कि भारत-अमरीका परमाणु समझौते के मुद्दे पर यूपीए सरकार को समर्थन देने के अपने फ़ैसले को देश हित में बताया है.

अमर सिंह ने बीबीसी हिंदी के विशेष कार्यक्रम 'आपकी बात बीबीसी के साथ' में चर्चा के दौरान इस बात की पुष्टि की कि दो सांसद, जयप्रकाश और मुनव्वर हुसैन इस मुद्दे पर सरकार को समर्थन देने के ख़िलाफ़ हैं.

लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि सभी सांसदों को विश्वास मत के दौरान सरकार के पक्ष में मतदान करने के लिए 'व्हिप' जारी किया जाएगा और अगर वो पार्टी के 'व्हिप' के विपरीत मतदान करते हैं तो उन्हे अपनी लोकसभा सदस्यता से इस्तीफ़ा देना पड़ेगा.

अमर सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश के एक निर्दलीय सांसद बालेश्वर यादव ने समझौते का समर्थन करने का फ़ैसला किया है. अमर सिंह ने उम्मीद है जताई कि कम-से-कम 38 सांसद सरकार के समर्थन में मतदान करेंगे.

'कलाम की राय'

मगर क्या वजह है कि समाजवादी पार्टी सरकार में शामिल हुए बिना बाहर से समर्थन देना चाहती है?

 अगर लालू प्रसाद यादव के 24 सांसदों में उनके सात मंत्री हैं और इस अनुपात को देखा जाए तो समाजवादी पार्टी के 39 सांसदों को देखते हुए उसे कम से कम 11 मंत्री पद मिलने चाहिए. लेकिन हम मंत्री पद के लिए नहीं बल्कि सरकार की मदद करने आए हैं
अमर सिंह

इसके जवाब में अमर सिंह ने कहा, "अगर लालू प्रसाद यादव के 24 सांसदों में उनके सात मंत्री हैं और इस अनुपात को देखा जाए तो समाजवादी पार्टी के 39 सांसदों को देखते हुए उसे कम से कम 11 मंत्री पद मिलने चाहिए. लेकिन हम मंत्री पद के लिए नहीं बल्कि सरकार की मदद करने आए हैं."

उन्होंने कहा, "भाजपा हम पर आरोप लगा रही है कि डील के पीछे डील है. अगर हम मंत्री पद स्वीकार करते हैं तो भाजपा को समाजवादी पार्टी पर हमला करने की वजह मिल जाएगी. हम उन्हें यह मौक़ा क्यों दें?"

समाजवादी पार्टी यह बात भी कहती रही है कि वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे कलाम से सलाह करने के बाद ही उन्होंने परमाणु समझौते का समर्थन करने का फ़ैसला किया. मगर यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने देश के उन जाने-माने परमाणु वैज्ञानिकों से भी बात की जो इस समझौते का विरोध कर रहे थे तो अमर सिंह ने कुछ तल्ख़ अंदाज़ में कहा, "वामदलों की तरह हमारा इतना विषद बु्द्धिवादी सेल नहीं है. हमने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे कलाम से इसलिए बात की क्योंकि वो देश में सर्वमान्य हैं और देश का युवा और प्रबुद्ध वर्ग उन्हें इज़्ज़त से देखता है. उन्होंने हमें समझाया यह समझौता किस तरह भारत के हित में हैं."

'सांप्रदायिकता का ख़तरा'

अमर सिंह ने फिर इस बात पर बल दिया कि आडवाणी-नरेंद्र मोदी की कथित सांप्रदायिकता के ख़तरे को टालने के लिए भी सरकार का समर्थन ज़रूरी है. मगर मायावती ने हाल में चेतावनी दी थी कि देश के मुसलमानों में से कई लोग अमरीका के साथ समझौते से ख़ुश नहीं हैं.

 मुसलमानों को यह बताने की ज़रूरत है कि बुश तो जा रहे हैं लेकिन लालकृष्ण आडवाणी, नरेंद्र मोदी और मायावती की तिकड़ी आने वाली है, ऐसे में मुसलमानों को सोचना है कि आडवाणी जो बुश से ज्यादा ख़तरनाक हैं उनको रोकना है या राष्ट्रपति बुश को रोकना है?

पारंपरिक तौर पर समाजवादी पार्टी को मुस्लिम समुदाय से समर्थन मिलता रहा है, कितना ख़तरा महसूस हो रहा उन्हें मुस्लिम मतदाताओं के बिखरने से. अमर सिंह ने कहा, "हम मानते हैं कि अमरीका के ईरान और इराक़ में रवैए से मुसलमानों का नाराज़ होना स्वाभाविक है. मगर देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने हमें आश्वासन दिया है कि अमरीका के दबाव में ईरान-पाकिस्तान-भारत गैस पाइपलाइन परियोजना को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा."

समाजवादी पार्टी के महासचिव ने कहा, "मुसलमानों को यह बताने की ज़रूरत है कि बुश तो जा रहे हैं लेकिन लालकृष्ण आडवाणी, नरेंद्र मोदी और मायावती की तिकड़ी आने वाली है, ऐसे में मुसलमानों को सोचना है कि आडवाणी जो बुश से ज्यादा ख़तरनाक हैं उनको रोकना है या राष्ट्रपति बुश को? दुसरी बात यह कि देश का मुसलमान उतना ही देशभक्त है जितना कि देश के दूसरे नागरिक."

जहाँ तक आने वाले महीनों में सरकार को बाहर से समर्थन देने की बात है अमर सिंह ने स्पष्ट किया कि वो वामपंथियों की तरह संघर्ष का रवैया नहीं अपनाएँगे. उन्होंने कहा ‘हम सरकार को ब्लैकमेल नहीं करना चाहते.’

जहां तक पेट्रोल के बढते दामों की और बढ़ती मंहगाई की बात है, उन्होंने अपनी चिंताएं सरकार के सामने रख दी हैं. उनका कहना था कि वो सरकार को सलाह ज़रूर देंगे और अगर सरकार उनकी सलाह को सही मानेगी तो उस पर अमल करेगी.

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