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समर्थन वापसी पर वाम नेताओं का पत्र | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वामपंथियों का संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के नेता प्रणव मुखर्जी को भेजा पत्र श्री प्रणव मुखर्जी प्रिय श्री प्रणव मुखर्जी आपके 7 जुलाई, 2008 के पत्र के संदर्भ में जिसमें आपने भारत-अमरीका परमाणु सहयोग पर यूपीए-वामदलों की समिति के बैठक 10 जुलाई को बुलाने की बात कही है. हम इस बात का उल्लेख करना चाहते हैं कि 16 नवंबर, 2007 को समिति की छठी बैठक में आईएईए से बातचीत के संदर्भ में फ़ैसला किया गया था कि सरकार जब बातचीत करेगी तो मसौदे को अंतिम रूप देने से पहले समिति के समक्ष रखा जाएगा. आईएईए सचिवालय के साथ बातचीत किए जा रहे निगरानी समझौते के मसौदे को अभी तक समिति को नहीं सौंपा गया है. बिना मसौदे के समिति कोई फ़ैसले पर नहीं पहुँच सकती है. चूंकि यूपीए ने समिति के मसौदे को सौंपने से इनकार कर दिया है इसलिए 10 जुलाई की बैठक का कोई औचित्य नहीं रह जाता है. इसके अलावा प्रधानमंत्री के विदेश यात्रा के दौरान ये घोषणा करने के बाद कि सरकार बहुत जल्द आईएईए के पास जाएगी, 10 जुलाई की बैठक का कोई मतलब नहीं रह जाता है. जैसा कि आप जानते हैं कि वामपंथी दलों ने फ़ैसला किया था कि सरकार के आईएईए के पास जाने पर वे समर्थन वापस ले लेंगे. प्रधानमंत्री की घोषणा के मद्देनज़र ये वक्त आ गया है. प्रकाश कारत |
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