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'...तो इतिहास कभी माफ़ नहीं करेगा' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के परमाणु ऊर्जा आयोग (एईसी) के प्रमुख अनिल काकोदकर ने कहा है कि यदि अमरीका के साथ परमाणु समझौता नहीं हुआ तो इतिहास कभी माफ़ नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि यह समझौता देश की नीतियों से समझौता किए बिना भविष्य की ऊर्जा ज़रुरतों को पूरा करने का एक अवसर है. अनिल काकोदकर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब परमाणु समझौते को लेकर राजनीतिक खींचतान चरम पर है और वामदलों ने साफ़ कर दिया है कि यदि यूपीए सरकार समझौते पर आगे बढ़ती है तो वे समर्थन वापस ले लेंगे. बैंगलोर में इंडियन एकैडमी ऑफ़ साइंसेस में भारत के परमाणु कार्यक्रम पर बोलते हुए उन्होंने कहा, "यह एक मौक़ा है जब हम अपने सिद्धांतों से समझौता किए बग़ैर भविष्य की ऊर्जा ज़रुरतों को पूरा कर सकते हैं." अमरीका के साथ असैन्य परमाणु समझौते को देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए हितकर बताते हुए उन्होंने कहा, "यदि अभी हम यह समझौता नहीं करते हैं तो इतिहास कभी माफ़ नहीं करेगा." उन्होंने इस परमाणु समझौते को देश की ऊर्जा ज़रुरतों को पूरा करने के लिए 'सबसे पुख़्ता और व्यावहारिक' तरीक़ा बताया. बाद में जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ समझौते से लेकर परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों (एनएसजी) के साथ समझौते का कार्य क्या इस साल के अंत तक पूरा हो सकता है, उन्होंने कहा, "यह जितनी जल्दी हो बेहतर है लेकिन यह सब मेरे हाथों में तो है नहीं." उन्होंने यह भी कहा कि देश में यूरेनियम की कमी है और इसकी वजह से परमाणु ऊर्जा संयंत्र अपनी क्षमता से आधे पर काम कर रहे हैं. |
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