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समाजवादी पार्टी देगी यूपीए को समर्थन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
समाजवादी पार्टी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि परमाणु समझौते के मुद्दे पर यूपीए सरकार विश्वासमत रखती है तो वो इसका समर्थन करेगी. इससे पहले समाजवादी पार्टी ने यह तो कहा था कि वह परमाणु समझौते का समर्थन करती है लेकिन सरकार को समर्थन की बात साफ़ तौर पर नहीं कही थी. इस बीच समाजवादी पार्टी के इस रुख़ को लेकर तीसरे मोर्चे यानी यूएनपीए में दरार पड़ती दिखाई दे रही है. हालांकि यूएनपीए छोड़ने के सवाल पर समाजवादी पार्टी के महासचिव अमर सिंह ने साफ़ कर दिया है कि 'देश के हित में कोई भी त्याग करने' को वे तैयार हैं. समर्थन जब अमर सिंह से पूछा गया कि यदि परमाणु समझौते के मुद्दे पर वामदलों ने समर्थन वापस ले लिया और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को विश्वासमत हासिल करना पड़ा तो समाजवादी पार्टी का क्या रुख़ होगा, उन्होंने कहा, "हम सरकार का सौ प्रतिशत समर्थन करेंगे." टेलीविज़न चैनल सीएनएन आईबीएन के एक कार्यक्रम 'डेविल्स एडवोकेट' में अमर सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इस प्रस्ताव को स्वीकार करने में कोई ख़राबी नज़र नहीं आती कि सरकार पहले अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) से समझौता कर ले और फिर परमाणु आपूर्ति देशों के पास जाने के बाद संसद में आए. उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री एक आदरणीय व्यक्ति हैं और हमें इसमें कोई ख़राबी नज़र नहीं आती, हम इसका समर्थन करते हैं." यह पूछे जाने पर कि क्या वे संसद में भी परमाणु समझौते के मुद्दे पर भी समर्थन देंगे, समाजवादी पार्टी महासचिव ने कहा, "हम निश्चित तौर पर समर्थन देंगे क्योंकि हम कोई राजनीति नहीं कर रहे हैं." जब अमर सिंह से यह पूछा गया कि यूपीए सरकार को उनका समर्थन मुद्दों पर आधारित होगा या इसकी कोई शर्त होगी, उन्होंने कहा, "अभी इसका समय नहीं आया है. अभी तो (कांग्रेस और वामदलों की) शादी चल रही है जब तलाक़ हो जाएगा तो हम यह फ़ैसला भी कर लेंगे. लेकिन हम महंगाई के मुद्दे पर और पेट्रोलिय मंत्रालय के व्यवहार पर सरकार को कोई प्रमाण पत्र नहीं दे सकते." इस सवाल पर कि क्या महंगाई और पेट्रोलियम दामों के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी यूपीए से समर्थन वापस भी ले सकती है, अमर सिंह ने कहा कि इसका फ़ैसला तो सरकार को करना है. उन्होंने दोहराया कि परमाणु समझौते के मुद्दे पर उनकी पार्टी का रुख़ बदलने वाला नहीं है. यूएनपीए में दरार समाजवादी पार्टी के इस रुख़ को लेकर तीसरे मोर्चे यूनाइटेड नेशनल प्रोग्रेसिव एलायंस (यूएनपीए) में दरार पड़ती दिखाई पड़ रही है.
एक साल पहले गठित इस मोर्चे में समाजवादी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी थी और शनिवार को यूएनपीए के एक अन्य घटक दल इंडियन नेशनल लोकदल के नेता ओमप्रकाश चौटाला ने साफ़ कर दिया है कि अब यूएनपीए में समाजवादी पार्टी के लिए जगह नहीं है. एक अन्य घटक दल तेलुगूदेशम पार्टी के नेता चंद्राबाबू नायडू ने समाजवादी पार्टी के रुख़ पर सीधी टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि यूएनपीए परमाणु समझौते पर राष्ट्रीय बहस की माँग कर चुका है और वह इस पर क़ायम है. उन्होंने कहा कि आठ महीने बाद देश में चुनाव होने वाले हैं और अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश का कार्यकाल भी ख़त्म हो रहा है, ऐसे में समझौते को लेकर जल्दी क्यों मचाई जा रही है. लेकिन समाजवादी पार्टी को अब यूएनपीए की चिंता दिखाई नहीं दे रही है. पत्रकारों से बात करने हुए जब ओमप्रकाश चौटाला के बयान पर प्रतिक्रिया पूछी गई तो पार्टी महासचिव अमर सिंह ने कहा, "हम देश हित में कोई भी त्याग करने को तैयार हैं." उन्होंने कहा, "परमाणु समझौते को पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम के सही ठहराने के बाद सवाल सोनिया गाँधी या मनमोहन सिंह को समर्थन देने का नहीं है, यह देश के हित का मामला है." |
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