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'देश के लिए बुश से बड़ा ख़तरा आडवाणी' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
समाजवादी पार्टी ने भारत अमरीका परमाणु सौदे पर यूपीए सरकार को समर्थन देने का फ़ैसला कर लिया है और पार्टी का कहना है कि यह समर्थन धर्मनिरपेक्ष ताकतों को दिया गया है. बीबीसी के साथ देर रात एक बातचीत में सपा महासचिव अमर सिंह ने कहा कि देश के लिए अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के साम्राज्यवाद से बड़ा ख़तरा लालकृष्ण आडवाणी और नरेंद्र मोदी जैसी सांप्रदायिक ताकतों से है. उन्होंने कहा,'' यह समर्थन यूपीए सरकार को नहीं है बल्कि धर्मनिरपेक्ष ताकतों को दिया गया है. मुझे समझ में नहीं आता कि बीजेपी, वामपंथी दल और बीएसपी जैसी पार्टियां एक साथ आकर धर्मनिरपेक्ष ताकतों का विरोध करेंगी.'' उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति कलाम का हवाला देते हुए कहा कि कलाम ने परमाणु समझौते को देश हित में बताया है और यूपीए सरकार को समर्थन देने का फ़ैसला इसी पर आधारित है. उन्होंने कहा,'' अगर परमाणु समझौते के मुद्दे पर संसद में यूपीए सरकार का समर्थन करने की बात आई तो हम पीछे नहीं हटेंगे. हमने पुराने गिले शिकवे भुलाकर कांग्रेस का साथ दे रहे हैं.'' उनका कहना था कि कांग्रेस और सपा के बीच नई साझेदारी एक नयी राजनीतिक सच्चाई का आगाज़ है और दोनों के रुख सकारात्मक रहे तो दोस्ती परवान चढ़ सकती है. उन्होंने उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती को भी देश के लिए खतरा बताया लेकिन वो वाप दलों पर किसी तरह का कटाक्ष करने से बचते रहे. इस बीच समाजवादी पार्टी के इस रुख़ को लेकर तीसरे मोर्चे यानी यूएनपीए में दरार पड़ती दिखाई दे रही है. हालांकि यूएनपीए छोड़ने के सवाल पर समाजवादी पार्टी के महासचिव अमर सिंह ने साफ़ कर दिया है कि 'देश के हित में कोई भी त्याग करने' को वे तैयार हैं. जब अमर सिंह से पूछा गया कि यदि परमाणु समझौते के मुद्दे पर वामदलों ने समर्थन वापस ले लिया और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को विश्वासमत हासिल करना पड़ा तो समाजवादी पार्टी का क्या रुख़ होगा, उन्होंने कहा, "हम सरकार का सौ प्रतिशत समर्थन करेंगे." इससे पहले शनिवार को संवाददाताओं से बातचीत में अमर सिंह ने कहा कि यूपीए सरकार को उनका समर्थन मुद्दों पर आधारित होगा और उनके लिए सबसे बड़ा मुद्दा मंहगाई और पेट्रोल की बढ़ती कीमतें हैं. यूएनपीए में दरार समाजवादी पार्टी के इस रुख़ को लेकर तीसरे मोर्चे यूनाइटेड नेशनल प्रोग्रेसिव एलायंस (यूएनपीए) में दरार पड़ती दिखाई पड़ रही है.
एक साल पहले गठित इस मोर्चे में समाजवादी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी थी और शनिवार को यूएनपीए के एक अन्य घटक दल इंडियन नेशनल लोकदल के नेता ओमप्रकाश चौटाला ने साफ़ कर दिया है कि अब यूएनपीए में समाजवादी पार्टी के लिए जगह नहीं है. एक अन्य घटक दल तेलुगूदेशम पार्टी के नेता चंद्रबाबू नायडू ने समाजवादी पार्टी के रुख़ पर सीधी टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि यूएनपीए परमाणु समझौते पर राष्ट्रीय बहस की माँग कर चुका है और वह इस पर क़ायम है. उन्होंने कहा, "परमाणु समझौते को पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम के सही ठहराने के बाद सवाल सोनिया गाँधी या मनमोहन सिंह को समर्थन देने का नहीं है, यह देश के हित का मामला है." |
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