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सरकार के ख़िलाफ़ वाम दलों की गोलबंदी
वाम नेता
वाम नेता विश्वास मत के ख़िलाफ़ दूसरे दलों से बात कर रहे हैं
वाम दलों ने यूपीए सरकार पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ समझौते के मसौदे को राष्ट्रहित के विपरीत बताते हुए यूपीए सरकार के ख़िलाफ़ गोलबंदी तेज़ कर दी है.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के महासचिव प्रकाश कारत ने कहा कि मसौदे के स्पष्ट है कि भारत अपने संपूर्ण असैनिक परमाणु कार्यक्रम को आईएईए की सतत निगरानी में रखने जा रहा है.

उन्होंने कहा कि ख़तरा इस बात को लेकर है कि अगर विदेश नीति के मुद्दों पर भारत अमरीका के साथ नहीं चलता है तो ये परमाणु रिएक्टर बंद हो सकते हैं क्योंकि उन्हें ईंधन नहीं मिलेगा.

सीपीएम महासचिव ने अन्य वाम नेताओं के साथ पत्रकारों से कहा कि भारत को यूरेनियम की निर्बाध आपूर्ति का स्पष्ट भरोसा नहीं दिया गया है.

उन्होंने कहा कि वाम मोर्चा निगरानी समझौते के उतने ख़िलाफ़ नहीं हैं जितना कि इस बात को लेकर कि यह अमरीका के साथ 123 समझौते की ओर बढ़ने वाला क़दम है.

गोलबंदी

इस बीच वामदलों ने परमाणु क़रार के मुद्दे पर संसद में विश्वास मत प्रस्ताव पेश होने से पहेल परमाणु क़रार विरोधी राजनीतिक दलों के साथ गोलबंदी शुरू कर दी है.

शुक्रवार को जनता दल (सेक्युलर) के सांसद दानिश अली ने प्रकाश कारत से मुलाक़ात की.

दूसरी तरफ़ तेलुगू देशम के नेता येरन नायडू ने भी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के शीर्ष नेताओं से मुलाक़ात की.

दानिश अली और करात की मुलाकात को राजनीतिक रुप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मनमोहन सरकार को विश्वास मत हासिल करने के लिए क्षेत्रीय दलों के एक-एक वोट को जुटाना आसान नहीं होगा.

सीपीएम के पोलित ब्यूरो सदस्य सीताराम येचुरी ने कहा कि अब समय आ गया है कि जब परमाणु विरोधी राजनीतिक दल एक ठोस रुख अपनाएं ताकि यह सरकार विश्वास मत हासिल न कर सके और परमाणु करार लागू न हो पाए.

सोनिया और कारतराजनीतिक गतिरोध पर..
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