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विपक्ष ने प्रधानमंत्री से सफ़ाई माँगी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार से वाम मोर्चे की समर्थन वापसी के कारण तेज़ हुई राजनीतिक गतिविधियों के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से मिले हैं. ग़ौरतलब है कि राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया था कि वे गुरुवार शाम उनसे मिलें. ये मुलाक़ात ऐसे समय में हुई है जब सरकार के अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी में जाने के मुद्दे पर वामदलों के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी ने सरकार से सफ़ाई माँगी है और कई आरोप लगाए हैं. गुरुवार को एक पत्रकारवार्ता में वामदलों के नेताओं ने आईएईए के साथ समझौते के मसौदे पर सरकार के आईएईए में जाने पर कई आरोप लगाए और माँग की कि प्रधानमंत्री को बताना चाहिए कि उनकी अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से क्या बात हुई है. उधर भारतीय जनता पार्टी ने भी कई सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने 'देश को धोखा दिया' है. विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा है कि 'सरकार ने अपनी विश्वसनीयता पूरी तरह खो दी' है. दूसरी ओर वरिष्ठ कांग्रेस नेता वीरप्पा मोइली ने कहा है कि भारत के आईएईए में समझौते के मसौदे को लेकर जाना समान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और वाम मोर्चा इस घटनाक्रम को ग़लत तरीक़े से समझ रहा है. कांग्रेस ने कहा है कि यह 'देश के साथ धोखा नहीं है बल्कि सरकार सामान्य प्रक्रिया का पालन' करना है. वामदलों का आरोप मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के महासचिव प्रकाश कारत ने कहा कि आठ जुलाई को जब वामपंथियों ने समर्थन वापसी की घोषणा की थी तो विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा था कि सरकार तब तक आईएईए में नहीं जाएगी जब तक वह संसद में विश्वासमत हासिल न कर ले. उनका कहना है कि प्रणव मुखर्जी ने कहा था कि उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री से भी बात की है लेकिन 24 घंटों से भी कम समय में सरकार ने आईएईए से कहा कि वे समझौते का समौदा प्रबंध समिति के सदस्यों को भेज दें. प्रकाश कारत ने कहा, "हमें प्रणव मुखर्जी की ईमानदारी पर कोई शंका नहीं लेकिन हम जानना चाहते हैं कि बुधवार की सुबह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अमरीकी राष्ट्रपति के बीच ऐसी क्या बात हुई कि सरकार को तुरंत आईएईए में जाना पड़ा." उन्होंने कहा, "सरकार को यदि झूठ बोलना है तो एक ही तरह का झूठ बोलना चाहिए न कि कई तरह के झूठ." उनका कहना था कि सरकार की ओर से वियना में कुछ कहा जा रहा है, कांग्रेस का प्रवक्ता कुछ और कह रहा है और सरकार का एक वरिष्ठ मंत्री कुछ और कह रहा है. वाम-यूपीए की बैठकों में वामदलों के उठाए सवालों और उन पर यूपीए सरकार के जवाबों के सारे दस्तावेज़ों को वामदलों ने पुस्तकाकार प्रकाशित कर दिया है और इसे प्रकाश कारत ने पत्रकारवार्ता में जारी कर दिया.
उन्होंने कहा कि आईएईए के मसौदे का वे अध्ययन कर रहे हैं और इसके हर पहलू का अध्ययन करने के बाद वे एक बार फिर मीडिया के पास आएँगे. 'धोखा' और 'प्रक्रिया' विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने तीख़ी प्रतिक्रिया जताते हुए कहा, "इस सरकार ने पूरी तरह अपनी विश्वसनीयता खो दी है और इसकी कथनी और करनी पर विश्वास नहीं किया जा सकता. सरकार के वरिष्ठ मंत्री के वचन पर कि सरकार आईएईए में विश्वास मत के बाद ही जाएगी, पर ही विश्वास नहीं किया जा सकता तो ये बहुत गंभीर विषय है." भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी ने तो आईएईए में जाने के सरकार के फ़ैसले को देश के साथ 'आधी रात हुआ धोखा' बताया. उनका कहना था कि परमाणु समझौते पर सरकार संसद में अपना बहुमत खो चुकी है. उनका कहना था, "प्रधानमंत्री और सोनिया गाँधी को इसका जवाब देना होगा." कांग्रेस ने खंडन किया लेकिन कांग्रेस के नेता वीरप्पा मोइली ने इन आरोपों का खंडन किया है. उनका कहना था कि जो कुछ हुआ वह देश के साथ कोई धोखा नहीं है बल्कि सरकार एक प्रक्रिया के तहत आईएईए के प्रबंध समिति के पास गई है. उन्होंने कहा कि सरकार ने देश के हित में जो किया है उसे धोखे की तरह नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा, "सरकार के विश्वासमत हासिल किए बिना आईएईए के प्रबंध समिति की बैठक नहीं होगी." |
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