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'दस जुलाई को राष्ट्रपति से मिलें प्रधानमंत्री' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने कहा है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह 10 जुलाई को उनसे मुलाक़ात करें. वामदलों ने बुधवार यानी नौ जुलाई को राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से मिलकर यूपीए सरकार से समर्थन वापसी का औपचारिक पत्र सौंप दिया था. अब राष्ट्रपति कार्यालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि इन गतिविधियों को देखते हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रपति से मुलाक़ात करें. मनमोहन सिंह जी-8 सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए जापान गए हुए थे और बुधवार देर रात भारत लौट रहे हैं. वाम दलों ने राष्ट्रपति को दिए पत्र के ज़रिए आग्रह किया है कि मनमोहन सिंह सरकार से जल्द से जल्द लोकसभा में बहुमत साबित करने को कहा जाए. राष्ट्रपति से मुलाक़ात बुधवार को राष्ट्रपति से मिलने वालों में प्रकाश करात, एबी बर्धन और देबब्रत बिसबास शामिल थे. इन नेताओं ने 12 बजे मुलाकात की और समर्थन वापसी का पत्र सौंपा. वामदलों ने 60 सांसदों की सूची भी दी. इसके बाद 12.45 बजे समाजवादी पार्टी के नेता अमर सिंह और राम गोपाल यादव भी राष्ट्रपति से मिले और 39 सांसदों की सूची भी सौंपी. समाजवादी पार्टी के नेताओं ने दोहराया कि वे कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए गठबंधन का समर्थन करते हैं. एक ओर सवा चार साल पुरानी यूपीए सरकार के सामने यह सबसे बड़ा राजनीतिक संकट है और दूसरी और राष्ट्रपति बनने के बाद प्रतिभा देवी पाटिल के सामने यह पहला राजनीतिक मसला है जिस पर उन्हें फ़ैसला लेना है. लोकसभा के 545 सीटों में से दो रिक्त हैं. इस तरह 543 सदस्यों में यूपीए के कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, डीएमके, राष्ट्रवादी कांग्रेस, पीएमके, जेएमएम, पीडीपी और चार कम सदस्यों वाले छोटे दलों के 224 सांसद हैं. वाम मोर्चे के 59 सांसद और उनके दो सहयोगी केरल कांग्रेस के सांसद अब सरकार के साथ नहीं हैं. लेकिन समाजवादी पार्टी के 39 सांसदों के समर्थन के साथ यूपीए को कुल 263 सांसदों का समर्थन हासिल हो जाता है. यदि कांग्रेस को राष्ट्रीय लोक दल के तीन, जनता दल (एस) के तीन और तेलंगाना राष्ट्रीय समिति के तीन सांसदों का समर्थन मिल जाता है तो सरकार को 272 सांसदों का समर्थन और लोकसभा में बहुमत मिल जाएगी. यूपीए इन्ही दलों से और निर्दलीयों से समर्थन जुटाने में लगी हुई है जबकि सभी दलों का नेतृत्व अपने सांसदों को अपनी मर्ज़ी के मुताबिक चलाने के प्रयास में जुटे हुए हैं. यही कारण है राजनीतिक हलकों में खलबली का. |
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