BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
बुधवार, 09 जुलाई, 2008 को 07:23 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
'यूपीए सरकार पारदर्शी नहीं, संघर्ष जारी रहेगा'
प्रकाश कारत
करात ने यूपीए सरकार को परमाणु समझौते का मसौदा छुपाने का आरोप लगाया
वामदलों ने बुधवार को राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से मिलकर यूपीए सरकार से समर्थन वापसी का औपचारिक पत्र सौंप दिया और आग्रह किया कि सरकार से सदन में विश्वास मत हासिल करने को कहा जाए.

पत्र सौंपने के बाद संवाददाता सम्मेलन में तीख़े तेवर दिखाते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी महासचिव प्रकाश कारत ने कहा, "यूपीए सरकार पारदर्शी नहीं है. हम पूरी कोशिश करेंगे कि ये परमाणु समझौता न हो और इसके लिए संघर्ष लगातार जारी रहेगा."

उधर कोलकाता से प्राप्त समाचारों के अनुसार सीपीएम के वरिष्ठ नेता ज्योति बसु ने वाम दलों द्वारा समर्थन वापस लेने पर नाखुशी ज़ाहिर की है.

उधर समाजवादी पार्टी ने भी राष्ट्रपति से मिलकर यूपीए सरकार को समाजवादी पार्टी के समर्थन से अवगत कराया है. पार्टी महासचिव अमर सिंह ने पत्रकारों को बताया, "हम ने राष्ट्रपति से मिलकर कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को को समाजवादी पार्टी के समर्थन की चिट्ठी सौंपी है और दोहराया है कि हम यूपीए के साथ हैं."

 यूपीए सरकार पारदर्शी नहीं है. हम पूरी कोशिश करेंगे कि ये परमाणु समझौता न हो और इसके लिए संघर्ष लगातार जारी रहेगा
प्रकाश कारत, सीपीएम महासचिव

वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री प्रणव मुखर्जी बुधवार को ही घोषणा कर चुके हैं कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार को जैसे ही राष्ट्रपति भवन से वामदलों के समर्थन वापसी की औपचारिक सूचना मिलेगी, वैसे ही सरकार जल्द से जल्द लोकसभा का विशेष सत्र बुलाकर विश्वास प्रस्ताव रखेगी.

'संसद का अपमान किया'

वाम दलों ने समर्थन वापसी का अलग पत्र राष्ट्रपति को सौंपा और एक संयुक्त पत्र के ज़रिए आग्रह किया कि मनमोहन सिंह सरकार से जल्द से जल्द लोकसभा में बहुमत साबित करने को कहा जाए.

कारत ने परमाणु समझौते के मसले पर यूपीए सरकार को आड़े हाथों लिया और सरकार की कड़ी आलोचना की.

उनका कहना था, "यूपीए सरकार ने संसद का अपमान किया है. दिसंबर में जब संसद में इस समझौते को आगे नहीं बढ़ाने पर सहमति बनी थी लेकिन फिर भी वो इस समझौते पर आगे बढ़े हैं."

इसके अलावा उनका कहना था कि यूपीए समन्वय समिति की बैठकों के दौरान वाम दलों ने बार-बार समझौते का मसौदा पेश करने के लिए कहा लेकिन उसे पेश नहीं किया गया.

संसद में दलों की संख्या

अंकगणित और विश्वासमत

वामदलों के समर्थन वापसी की अटकलों के बीच समाजवादी पार्टी को समर्थन देने के लिए राज़ी कर चुके यूपीए सरकार के कर्ताधर्ताओं ने दावा किया है कि सरकार को कोई ख़तरा नहीं है और सरकार संसद में विश्वासमत साबित करेगी.

एक ओर सवा चार साल पुरानी यूपीए सरकार के सामने यह सबसे बड़ा राजनीतिक संकट है और दूसरी और राष्ट्रपति बनने के बाद प्रतिभा देवी पाटिल के सामने यह पहला राजनीतिक मसला है जिस पर उन्हें फ़ैसला लेना है.

यूपीए और वामदलों के नेता
यूपीए नेता वाम को राज़ी करने में विफल रहे

लोकसभा के 545 सीटों में से दो रिक्त हैं. इस तरह 543 सदस्यों में यूपीए के कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, डीएमके, राष्ट्रवादी कांग्रेस, पीएमके, जेएमएम, पीडीपी और चार कम सदस्यों वाले छोटे दलों के 224 सांसद हैं.

वाम मोर्चे के 59 सांसद और उनके दो सहयोगी केरल कांग्रेस के सांसद अब सरकार के साथ नहीं हैं.

लेकिन समाजवादी पार्टी के 39 सांसदों के समर्थन के साथ यूपीए को कुल 263 सांसदों का समर्थन हासिल हो जाता है.

यदि कांग्रेस को राष्ट्रीय लोक दल के तीन, जनता दल (एस) के तीन और तेलंगाना राष्ट्रीय समिति के तीन सांसदों का समर्थन मिल जाता है तो सरकार को 272 सांसदों का समर्थन और लोकसभा में बहुमत मिल जाएगी.

यूपीए इन्ही दलों से और निर्दलीयों से समर्थन जुटाने में लगी हुई है जबकि सभी दलों का नेतृत्व अपने सांसदों को अपनी मर्ज़ी के मुताबिक चलाने के प्रयास में जुटे हुए हैं. यही कारण है राजनीतिक हलकों में खलबली का.

सोनिया औऱ कारतयूपीए बनाम वामदल
बीबीसी की विशेष प्रस्तुति, परमाणु क़रार पर पैदा हुए राजनीतिक गतिरोध पर..
अनिल काकोदकरकाकोदकर की चेतावनी
यदि अभी परमाणु समझौता नहीं हुआ तो इतिहास कभी माफ़ नहीं करेगा.
इससे जुड़ी ख़बरें
'हम हर हाल में सरकार बचाएंगे'
08 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस
सरकार पर असर नहीं: मनमोहन सिंह
08 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस
समर्थन वापसी पर वाम नेताओं का पत्र
08 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस
वामदलों की समर्थन वापसी की घोषणा
08 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>