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विश्वास मत के लिए विशेष सत्र | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की सरकार 21 जुलाई को संसद के विशेष सत्र में विश्वास प्रस्ताव रखेगी. इस प्रस्ताव पर 22 जुलाई को मतदान होगा. शुक्रवार शाम को राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीपीए) की बैठक के बाद कांग्रेस पार्टी के नेता वायलार रवि ने यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि 21 और 22 जुलाई को संसद का विशेष सत्र बुलाया जाएगा जिसमें सरकार विश्वास प्रस्ताव रखेगी और उस पर मतदान होगा. जापान से लौटने के बाद गुरुवार को ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से मुलाक़ात करके यह कहा था कि उनकी सरकार लोकसभा में विश्वास प्रस्ताव रखेगी. पिछले दिनों परमाणु समझौते को आगे बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) में जाने के मुद्दे पर वामपंथी दलों ने यूपीए सरकार से समर्थन वापस ले लिया था. लोकसभा में वामपंथी दलों के 59 सांसद हैं. शुक्रवार को ही यूपीए समन्वय समिति की भी बैठक हुई. बैठक में यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भरोसा व्यक्त किया कि सरकार लोकसभा में विश्वास मत हासिल कर लेगी. लोकसभा में समर्थन हासिल करने के लिए यूपीए नेताओं ने विचार-विमर्श भी किया. समाजवादी पार्टी ने सरकार का समर्थन करने की घोषणा की है और सोनिया गांधी ने समाजवादी पार्टी के इस क़दम का स्वागत किया. गठबंधन और अंक शुक्रवार को सुबह हुई यूपीए की बैठक में गठबंधन के सभी बड़े नेता मौजूद थे. गठबंधन से झारखंड मुक्तिमोर्चा के नेता शिबू सोरेन बैठक में नहीं थे लेकिन बताया गया कि उन्होंने अपना प्रतिनिधि भेजा था. जैसा कि बैठक के बाद प्रणब मुखर्जी ने बताया कि सभी नेताओं ने परमाणु समझौते को लेकर समर्थन ज़ाहिर किया और विश्वास जताया कि सरकार विश्वासमत हासिल करेगी. उन्होंने बताया कि सभी नेताओं ने इस पर खेद ज़ाहिर किया कि वामपंथी दलों को नहीं मनाया जा सका और वे यूपीए से अलग हो गए. प्रणव मुखर्जी ने कहा कि यूपीए के घटक दलों में आपस में कोई कटुता नहीं है. रेल मंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता लालू प्रसाद यादव ने कहा, "यूपीए के सभी दल एक साथ हैं, हमारे पास लोगों का समर्थन है और कोई कारण ही नहीं है कि सरकार विश्वासमत हासिल न कर सके." हालांकि वे यह जोड़ना नहीं भूले कि यदि सरकार विश्वासमत नहीं जीत पाती है तो आईएईए से समझौता नहीं किया जाएगा. वाममोर्चे के 59 सांसदों का समर्थन खोने के बाद यूपीए के पास सिर्फ़ 224 सांसद हैं और सपा के पूरे 39 सांसदों को मिलाकर भी यह संख्या बहुमत के लिए ज़रुरी 272 के जादुई आँकड़े से कुछ कम रह जाती है. यूपीए इस कमी को दूर करने के लिए कई छोटे दलों के संपर्क में है. हालांकि समाजवादी पार्टी का यह डर अभी दूर नहीं हुआ है कि उसके कुछ सांसद विद्रोह कर सकते हैं. लेकिन सरकार को एनडीए के कुछ दलों से भी आस लगी हुई है जिन्होंने सार्वजनिक तौर पर परमाणु समझौते का स्वागत किया है. |
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