BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
गुरुवार, 10 जुलाई, 2008 को 12:25 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
क्या है भारत-आईएईए समझौते में?
आईएईए
भारत ने आईएईए को मसौदा सौंप दिया है
भारत-अमरीका परमाणु समझौते के तहत भारत के लिए अनिवार्य है कि वह अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ एक संधि पर हस्ताक्षर करे जिसके नियमों के तहत भारत के असैनिक परमाणु ठिकानों पर निगरानी रखी जाए.

भारत सरकार के अनुरोध पर बुधवार को आईएईए सचिवालय ने आईएईए बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स के सदस्यों को निगरानी समझौते का मसौदा सौंप दिया.

भारत में वर्तमान राजनीतिक घटनाक्रम को देखते हुए इस मसौदे में सबसे अहम बात यह है - 'अपने देश के नागरिकों के भले के लिए भारत को परमाणु शोध और विकास गतिविधियाँ जारी रखने का संप्रभु और अभिन्न अधिकार है." मसौदे में बार-बार ये स्पष्ट किया गया है कि ये समझौता भारत के असैनिक परमाणु ठिकानों के बारे में है.

'तकनीकी विकास में दख़ल नहीं'

मसौदे में यह भी कहा गया है - "आईएईए निगरानी इस तरह से रखेगी ताकि भारत के आर्थिक और तकनीकी विकास में कोई बाधा न आए और इस समझौते के बाहर भारत द्वारा परमाणु सामग्री या साज़ो-सामान या तकनीक़ में कोई दख़ल न हो."

इस मसौदे में 18 जुलाई 2005 को भारत-अमरीका के संयुक्त बयान में शामिल कुछ अहम मुद्दों को भी जगह दी गई है.

इसमें पहला तो यह कि चरणबद्ध तरीक़े से असैनिक और सैन्य परमाणु संस्थाओं और अड्डों की पहचान की जाए और उन्हें अलग किया जाए.

 आईएईए निगरानी इस तरह से रखेगी ताकि भारत के आर्थिक और तकनीकी विकास में कोई बाधा न आए और इस समझौते के बाहर भारत द्वारा परमाणु सामग्री या साज़ो-सामान या तकनीक़ में कोई दख़ल न हो
समझौते का मसौदा

दूसरा यह कि भारत सरकार स्पष्ट तौर पर आईएईए को बताए कि उसके कौन कौन से असैन्य परमाणु प्रतिष्ठान हैं. तीसरा यह कि भारत सरकार फ़ैसला करे कि वह अपने असैनिक परमाणु प्रतिष्ठान आईएईए की निगरानी में सौंप रही है.

इस मसौदे में ज़ोर देकर यह भी कहा गया है कि निगरानी में रखे गए प्रतिष्ठानों में लाए जाने वाली सामग्री या फिर उपकरणों का इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने या फिर किसी सैनिक मक़सद के लिए नहीं किया जाएगा.

यह भी बताया गया है कि इस समझौते के बाद भारत अन्य अंतरराष्ट्रीय सहयोग समझौतों के तहत अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाज़ार से लगातार और बिना किसी विघ्न के ईंधन न केवल ले पाएगा बल्कि रणनीतिक रिज़र्व यानी बचाकर ईंधन रख भी पाएगा ताकि ऊर्जा की सप्लाई बाधित न हो.

इस समझौते के तहत भारत आईएईए को हर साल या फिर जब भी ये माँगी जाए, अपने असैनिक परमाणु ठिकानों के बारे में जानकारी देगा.

सोनिया और कारतराजनीतिक गतिरोध पर..
भारत में परमाणु करार पर पैदा हुए राजनीतिक गतिरोध पर बीबीसी हिंदी विशेष..
अनिल काकोदकरकाकोदकर की चेतावनी
यदि अभी परमाणु समझौता नहीं हुआ तो इतिहास कभी माफ़ नहीं करेगा.
इससे जुड़ी ख़बरें
'हम हर हाल में सरकार बचाएंगे'
08 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस
सरकार पर असर नहीं: मनमोहन सिंह
08 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस
समर्थन वापसी पर वाम नेताओं का पत्र
08 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस
वामदलों की समर्थन वापसी की घोषणा
08 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>