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बहुमत साबित करने में सफल होंगे: सोनिया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गठबंधन की एक अहम बैठक के बाद यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने कहा है कि सरकार बहुमत साबित करने में सफल होगी. उन्होंने कहा है कि हालांकि यूपीए परमाणु समझौते पर वामदलों को राज़ी नहीं कर सका लेकिन उन्होंने सरकार को जो समर्थन दिया उसके लिए वे उन्हें धन्यवाद देती हैं. शुक्रवार की सुबह हुई इस बैठक में सोनिया ने इस मसले पर समर्थन देने के लिए समाजवादी पार्टी का भी शुक्रिया अदा किया है. उल्लेखनीय है कि वामपंथी दलों ने परमाणु समझौते पर पारदर्शी न होने का आरोप लगाते हुए यूपीए सरकार से समर्थन वापस ले लिया है और अब वे विश्वासमत के ख़िलाफ़ मतदान करने की घोषणा कर चुके हैं. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से मुलाक़ात करके कहा था कि उनकी सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाकर विश्वासमत हासिल करेगी. विश्वासमत हासिल करने के लिए तारीख़ों का फ़ैसला करने के लिए शुक्रवार की शाम मंत्रिमंडल के संसदीय मामलों की समिति की एक बैठक होने जा रही है. इस बीच कांग्रेस कार्यसमिति की एक अहम बैठक भी बुलाई गई है. सोनिया गांधी की अध्यक्षता में यह बैठक भी शाम को होने जा रही है. गठबंधन और अंक शुक्रवार को सुबह हुई यूपीए की बैठक में गठबंधन के सभी बड़े नेता मौजूद थे. गठबंधन से झारखंड मुक्तिमोर्चा के नेता शिबू सोरेन बैठक में नहीं थे लेकिन बताया गया कि उन्होंने अपना प्रतिनिधि भेजा था. जैसा कि बैठक के बाद प्रणव मुखर्जी ने बताया कि सभी नेताओं ने परमाणु समझौते को लेकर समर्थन ज़ाहिर किया और विश्वास जताया कि सरकार विश्वासमत हासिल करेगी. उन्होंने बताया कि सभी नेताओं ने इस पर खेद ज़ाहिर किया कि वामपंथी दलों को नहीं मनाया जा सका और वे यूपीए से अलग हो गए. प्रणव मुखर्जी ने कहा कि यूपीए के घटक दलों में आपस में कोई कटुता नहीं है. रेलमंत्री और आरजेडी के नेता लालू प्रसाद यादव ने कहा, "यूपीए के सभी दल एक साथ हैं, हमारे पास लोगों का समर्थन है और कोई कारण ही नहीं है कि सरकार विश्वासमत हासिल न कर सके." हालांकि वे यह जोड़ना नहीं भूले कि यदि सरकार विश्वासमत नहीं जीत पाती है तो आईएईए से समझौता नहीं किया जाएगा. वाममोर्चे के 59 सांसदों का समर्थन खोने के बाद यूपीए के पास सिर्फ़ 224 सांसद हैं और सपा के पूरे 39 सांसदों को मिलाकर भी यह संख्या बहुमत के लिए ज़रुरी 272 के जादुई आँकड़े से कुछ कम रह जाती है. यूपीए इस कमी को दूर करने के लिए कई छोटे दलों के संपर्क में है. हालांकि समाजवादी पार्टी का यह डर अभी दूर नहीं हुआ है कि उसके कुछ सांसद विद्रोह कर सकते हैं. लेकिन सरकार को एनडीए के कुछ दलों से भी आस लगी हुई है जिन्होंने सार्वजनिक तौर पर परमाणु समझौते का स्वागत किया है. |
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