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'डील' से सामरिक कार्यक्रम पर ख़तरा नहीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय परमाणु ऊर्जा आयोग के चेयरमैन अनिल काकोदकर ने कहा है कि आईएईए के साथ निगरानी समझौत से देश के सामरिक कार्यक्रम पर कोई असर नहीं पड़ेगा. केंद्र सरकार ने शनिवार को कहा कि इस समझौते के मसौदे में भारतीय हितों को ऊपर रखा गया है. यह समझौता अमरीका के साथ प्रस्तावित असैनिक परमाणु सहयोग समझौते के लिए ज़रुरी है. इस पर उठे ताज़ा विवादों को देखते हुए केंद्र सरकार ने तीन आला अधिकारियों को आगे किया. इनमें काकोदकर के अलावा विएना में भारत के मुख्य वार्ताकार डॉ रवि ग्रोवर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन और विदेश सचिव शिवशंकर मेनन भी उपस्थित थे. इन्होंने कहा कि निगरानी समझौते में रिएक्टरों के लिए निर्बाध ईधन की आपूर्ति की गारंटी है तथा स्थायी आपूर्ति होने पर ही स्थायी निगरानी उपाय कायम रहेंगे. तीनों ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि निगरानी समझौते के आधार पर भारत विभिन्न देशों से परमाणु सामग्री और उपकरणों के समझौते करेगा जिसमें निर्बाध और निरंतर आपूर्ति को एक मुख्य मुद्दा बनाया जाएगा. अधिकारियों के अनुसार निगरानी समझौता भारत केंद्रित है और इसमें परमाणु परीक्षण करने पर रोक लगाने या नहीं लगाने की कोई चर्चा नहीं है. उनका कहना था कि अमेरीका के साथ हुई 123 समझौते में भी परमाणु परीक्षण का ज़िक्र नहीं है, लेकिन इसमें समझौते से हटने का प्रावधान है. अनिल काकोदकर ने कहा कि इस समझौते में पड़ोस के सामरिक माहौल के परिप्रेक्ष्य में भारत के रक्षा उपाय अधिकारों को स्वीकार किया गया है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'समझौते को नहीं समझ रहे वामपंथी'12 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस विश्वास मत के लिए विशेष सत्र11 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस सरकार के ख़िलाफ़ वाम दलों की गोलबंदी11 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस 'परमाणु करार में भारत को काफ़ी रियायतें...'11 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस 'अमरीका के साथ परमाणु करार की कोई ख़ास ज़रूरत नहीं'11 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस भविष्य में कांग्रेस के साथ से इनकार नहीं11 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस बहुमत साबित करने की कवायद तेज़10 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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