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मणिपुर में ग्रामीणों को हथियार मिलेंगे | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर सरकार ने अलगाववादी विद्रोहियों से मुक़ाबला करने के लिए पाँच सौ ग्रामीणों को हथियार देने का फ़ैसला किया है. अधिकारियों का कहना है कि सरकार की इस योजना का मक़सद ग्रामीणों को विद्रोहियों से आत्मरक्षा के लिए तैयार करना है. राज्य सरकार इन लोगों को हथियार मुहैया कराने के साथ ही उन्हें चलाने का भी प्रशिक्षण देगी. प्रशिक्षण के बाद इन्हें हर महीने तीन हज़ार रुपए का मानदेय भी दिया जाएगा. मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह ने शनिवार को कहा कि राज्य मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को बैठक में फ़ैसला लिया है कि अलगाववादियों से बुरी तरह प्रभावित राज्य के दो इलाक़ों हिरोक और चाजिंग में लोगों को हथियार मुहैया कराए जाएँ. ओकराम इबोबी सिंह ने बताया कि विद्रोहियों से निबटने के इस कार्यक्रम के तहत सरकार चाजिंग इलाक़े में 200 और हिरोक इलाक़े में 300 ग्रामीणों को हथियारों से लैस करेगी. 'विशेष पुलिस अधिकारी' मुख्यमंत्री ने बताया कि इन लोगों को विशेष पुलिस अधिकारी के तौर पर जाना जाएगा और इनकी तैनाती उनके गाँवों में ही की जाएगी ताकि वे विद्रोहियों से मुक़ाबला करने के लिए तैयार रह सकें.
राज्य के अधिकारियों का कहना है कि जून महीने से इन्हें तैनात कर दिया जाएगा. इनके लिए हिरोक में तीन और चाजिंग में दो बैरक भी बनाए जाएँगे. मणिपुर भारत के सबसे ज़्यादा अलगाववादी विद्रोह प्रभावित राज्यों में एक हैं. पुलिस का कहना है कि विद्रोहियों ने मार्च महीने में हिरोक में तीन लोगों को और अप्रैल महीने में लिलोंग चाजिंग में एक व्यक्ति को मार दिया था. तभी से इलाक़े के लोगों ने अपनी सुरक्षा के लिए हथियार मुहैया कराने की माँग को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ा दिया था. राज्य के कुछ मज़बूत विद्रोही संगठनों के ख़िलाफ़ वहाँ भारतीय सेना का अभियान चल रहा है लेकिन इसमें बहुत सफलता नहीं मिल पा रही है. पड़ोसी देश म्याँमार (बर्मा) से लगे राज्य के घने जंगलों में कुछ ठिकानों पर विद्रोहियों का क़ब्ज़ा अब भी बरक़रार है. |
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