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मंगलवार, 06 मार्च, 2007 को 10:36 GMT तक के समाचार
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शर्मिला को 'इच्छा के विरुद्ध' भोजन

शर्मिला
शर्मिला पिछले छह बरसों से गांधी की तरह अहिंसक तरीके से अपनी बात दर्ज करा रही हैं
भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में लागू सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून का विरोध कर रही शर्मिला को मणिपुर पुलिस ने 'उनकी इच्छा के विरुद्ध' खाना खिलाना शुरू कर दिया है.

शर्मिला वर्ष 2000 से इस क़ानून के विरोध में भूख हड़ताल पर हैं और पिछले दिनों ही उन्हें राजधानी दिल्ली से वापस मणिपुर ले जाया गया है.

दिल्ली में उन्हें काफ़ी गंभीर स्थिति में भर्ती कराया गया था और उन्हें जबरन खाना दिया जा रहा था ताकि उन्हें स्वस्थ किया जा सके. इस दौरान भी उनका विरोध जारी रहा.

दिल्ली में लगभग पाँच महीनों का वक्त बिताने के बाद जब शर्मिला मणिपुर लौटीं तो उन्होंने अपने 'सत्याग्रह' को फिर से शुरू करने की घोषणा की.

इसके मद्देनज़र राज्य पुलिस ने उन्हें दिल्ली से राज्य की राजधानी इंफाल लाए जाने के तुरंत बाद गिरफ़्तार कर लिया.

राज्य पुलिस ने बताया कि शर्मिला को अब 'उनकी इच्छा के विरुद्ध' भोजन दिया जा रहा है.

जारी है अभियान

 अब इस मुद्दे से संयुक्त राष्ट्र भी अवगत हो चुका है जिसके बाद अब पूर्वोत्तर राज्यों में मानवाधिकारों की स्थिति पर ध्यान दिया जाएगा
शर्मिला, सामाजिक कार्यकर्ता

उधर शर्मिला का मानना है कि दिल्ली में सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून का विरोध करना उनके अभियान के लिए फायदेमंद रहा क्योंकि इस दौरान इस मसले पर लोगों के बीच काफ़ी जागृति फैली.

उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, "अब इस मुद्दे से संयुक्त राष्ट्र भी अवगत हो चुका है जिसके बाद अब पूर्वोत्तर राज्यों में मानवाधिकारों की स्थिति पर ध्यान दिया जाएगा."

वहीं पुलिस का कहना है कि अगर शर्मिला को 'उनकी इच्छा के विरुद्ध' भोजन नहीं कराया जाएगा तो इससे गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं.

ग़ौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में यह क़ानून ख़ासा विवादित में रहा है और इसके विरोध में पूर्वोत्तर राज्यों में विरोध-प्रदर्शन होते रहे हैं.

पिछले वर्ष पूर्वोत्तर राज्यों की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लोगों को इस विशेषाधिकार क़ानून पर विचार करने का आश्वासन भी दिया था.

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