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हड़ताल के बीच मनमोहन की यात्रा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह शनिवार को पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर की यात्रा पर हैं. ये दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब राज्य के दो संगठनों ने हड़ताल का आहवान किया है. अलगाववादी संगठन रिवोल्यूशनरी पीपुल्स फ़्रंट (आरपीएफ़) प्रधानमंत्री की यात्रा के विरुद्ध 12 घंटे की हड़ताल का आहवान किया है. इस हड़ताल का कारण है विवादास्पद सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून जिसके ख़िलाफ़ पूरे राज्य में पहले भी प्रदर्शन होते रहे हैं. आरपीएफ़ का आरोप है कि मणिपुर में मानवाधिकारों का उल्लंघन और मुठभेड़ों में लोगों का मारा जाना आम बात हो गई है. उधर एक और संगठन एक्शन कमेटी अगेंस्ट तिपाइमुख प्रॉजेक्ट ने भी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मणिपुर यात्रा के ख़िलाफ़ 24 घंटे की हड़ताल बुलाई है. ये संगठन चूड़चाँदपुर ज़िले में तिपाइमुख में एक बाँध बनाए जाने का विरोध कर रहे हैं. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की यात्रा के दौरान कड़े सुरक्षा इंतज़ाम किए गए हैं. प्रधानमंत्री अपनी यात्रा के दौरान राज्य में कांगला में एक जनसभा को संबोधित करेंगे और एक खेल अकादमी, सम्मेलन केंद्र और मणिपुर प्रौद्यौगिकी संस्थान की नींव भी रखेंगे. फ़िलहाल ये स्पष्ट नहीं है कि प्रधानमंत्री राज्य में विवादास्पद तिपाइमुख बाँध का नींव रखेंगे या नहीं. | इससे जुड़ी ख़बरें भारतीय सेना का विद्रोही अड्डे पर क़ब्ज़ा09 नवंबर, 2004 | भारत और पड़ोस पूर्वोत्तर में सेना ने बड़ा अभियान छेड़ा06 नवंबर, 2004 | भारत और पड़ोस मणिपुर में 15 दिन का चक्का जाम20 सितंबर, 2004 | भारत और पड़ोस मणिपुर: पाटिल से बातचीत विफल05 सितंबर, 2004 | भारत और पड़ोस असम राइफ़ल्स के जवानों को चेतावनी25 अगस्त, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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