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पत्रकारों ने किया विद्रोहियों का विरोध | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मणिपुर में विद्रोहियों की धमकियों के विरोध में गुरुवार को अख़बार नहीं छपे. ये विरोध इसलिए दर्ज कराया गया क्योंकि हाल में एक स्थानीय अख़बार के संपादक को डाक के ज़रिए एक छोटा ग्रेनेड भेजा गया था. संपादक की अच्छी किसमत थी कि ग्रेनेड फटा नहीं. ये ग्रेनेड अलगावावादी संगठन पीपुल्स रेवोल्युश्नरी अर्मी ऑफ़ कांगलीपाक ने भेजा था. कांगलीपाक मणिपुर का प्राचीन नाम है. पत्रकार युमनाम रूपचंद्र का कहना था, "आज न अंग्रेज़ी और न किसी स्थानीय भाषा में कोई अख़बार छपा है." अंग्रेज़ी के अंख़बार सेंगाई एक्सप्रेस के संपादक खोगेंद्र खोमद्राम, जिन्हें ग्रेनेड वाला पार्सल भेजा गया था, कहते हैं कि उसके साथ एक चेतावनी भी थी. उनका कहना था, "विद्रोहियों ने चेतावनी दी थी कि यदि हम उनके प्रतिद्वंद्वी विद्रोही संगठन के प्रेस बयान छापते हैं तो हमें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. हम ऐसा माहौल में कैसे काम कर सकते हैं?" 'चेतावनी वापस लें' ऑल मणिपुर जरनलिस्ट यूनियन और मणिपुर एडिटर्स फ़ोरम ने इस धमकी के विरोध में प्रदर्शन किया और उनका कहना था कि जब तक विद्रोही अपनी धमकी वापस नहीं लेते तब तक राज्य में कोई अख़बार नहीं छपेगा. ऑल मणिपुर जरनलिस्ट यूनियन के अध्यक्ष एस हेमंत का कहना था, "हमने मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह से मुलाकात की है और सुरक्षा की माँग की है. नहीं तो यहाँ बहुत असुरक्षा की भावना है." पिछले साल अलगाववादी विद्रोहियों ने मणिपुर के एक दैनिक के ब्यूरो प्रमुख रतन लुवांग्चा पर गोली चलाई थी और उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया था. | इससे जुड़ी ख़बरें मणिपुर में पहले चरण का चुनाव संपन्न08 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस शर्मीला ने प्रधानमंत्री का आश्वासन ठुकराया06 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'विशेषाधिकार क़ानून में सुधार किए जाएंगे'02 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस मणिपुर में विद्रोहियों के हमले, प्रदर्शन21 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस नगा एकीकरण की माँग दोहराई16 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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