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शनिवार, 30 सितंबर, 2006 को 15:44 GMT तक के समाचार
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'मुंबई धमाकों में पाकिस्तान का हाथ'
मुंबई
पुलिस के अनुसार इस मामले में 15 लोग गिरफ़्तार किए गए हैं
मुंबई पुलिस ने दावा किया है कि 11 जुलाई को हुए मुंबई बम धमाकों की गुत्थी सुलझा ली गई है और इनके पीछे पाकिस्तानी गुप्तचर एजेंसी आईएसआई और चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का हाथ होने के सबूत मिले हैं.

सात अलग-अलग जगहों पर हुए इन धमाकों में 187 लोग मारे गए थे और लगभग 700 घायल हो गए थे.

मुंबई में एक संवाददाता सम्मेलन में मुंबई पुलिस आयुक्त एएन रॉय ने दावा किया कि इन धमाकों की योजना आईएसआई और लश्कर ने बनाई और इसमें लश्कर के भारत स्थित कुछ लोगों और युवा संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ़ इंडिया (सिमी) के कुछ सदस्यों की मदद ली गई.

पुलिस आयुक्त के अनुसार इस मामले में 15 लोग गिरफ़्तार किए गए हैं जिनमें से 12 लोगों की इसमें सीधी भूमिका होने के प्रमाण हैं.

पाकिस्तान ने खंडन किया

उधर पाकिस्तान ने मुंबई पुलिस के आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा है कि उसकी गुप्तचर एजेंसी आईएसआई का इन धमाकों में कोई हाथ नहीं है.

पाकिस्तान का ये भी कहना था इस मामले में भारत ने पाकिस्तान का हाथ होने का कोई सबूत पेश नहीं किया है.

दूसरी ओर पुलिस कमिश्नर के संवाददाता सम्मेलन से ठीक पहले महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री आरआर पाटिल ने दावा किया था कि ये पाकिस्तान स्थित चरमपंथी संगठनों का संयुक्त अभियान था जिसकी योजना फ़रवरी-मार्च में बनाई गई.

मुंबई धमाकों में 187 लोग मारे गए और 700 से ज़्यादा घायल हुए

उनका कहना था कि इस मामले में जाँच अब पूरी हो गई है लेकिन और गिरफ़्तारियाँ हो सकती हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में 'फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट' का गठन किया जाएगा और सुनवाई दो साल के भीतर पूरी कर ली जाएगी.

'ग्यारह पाकिस्तानी शामिल'

मुंबई पुलिस प्रमुख एएन रॉय का कहना था कि इस कार्रवाई को अंजाम देने से पहले लश्कर के कुछ स्थानीय लोग कई बार पाकिस्तान के बहावलपुर ज़िले में जाकर प्रशिक्षण पाकर आए थे.

उनके अनुसार इनमें से मुख्य थे फ़ैज़ल शेख़, कमालुद्दीन अहसान और ऐहतेशाम सिद्दीक़ी.

उन्होंने ये भी कहा कि ग्यारह पाकिस्तानी नेपाल सीमा, गुजरात सीमा और बांग्लादेश सीमा से इस काम को अंजाम देने भारत आए और उनके रहने की व्यवस्था फ़ैज़ल शेख़ ने चार जगहों पर की.

एएन रॉय के अनुसार 15 से 20 किलो आरडीएक्स एहसानुल्ला नाम का व्यक्ति पाकिस्तान से लाया और इसमें अमोनियम नाइट्रेट मिलाया गया और सात प्रेशर कुकर में ये सामग्री डालकर बम तैयार किए गए.

मुंबई पुलिस के अनुसार सात बम बनाए गए और सात टीमों के सुपुर्द किए गए. हर टीम में एक भारतीय और एक पाकिस्तानी था.

सात टीमें तैयार की गईं

उनका कहना है कि बाक़ी टीमों के सदस्य तो टाइमर वाले बम ट्रेनों में छोड़ ट्रेन से उतर गए लेकिन लहौर का सलीम ट्रेन से उतर नहीं पाया और बांद्रा धमाके में मारा गया. उसका शव लेने आज तक कोई नहीं आया.

पुलिस का कहना है कि अल क़ायदा का हाथ होने के कोई सबूत नहीं मिले हैं

पुलिस का कहना है कि एक अन्य पाकिस्तानी मोहम्मद अली उर्फ़ अबू ओसामा उर्फ़ अबू उम्मैद धमाकों के बाद पुलिस के साथ एक मुठभेड़ में मारा गया.

पुलिस आयुक्त के अनुसार इस पूरे कांड में सात भारतीय शामिल थे और इनमें से चार- फ़ैज़ल शेख़, कमालुद्दीन, ऐहतेशाम सिद्दीक़ी और नावेद को गिरफ़्तार कर लिया गया है जबकि तीन अन्य की तलाश हो रही है.

उनका कहना था कि इस मामले में सुराग मिलने बहुत कठिन थे और पुलिस ने फ़ोन पर हो रही बातचीत और विस्तृत जाँच के ज़रिए इस गुत्थी को सुलझाया.

'अल क़ायदा से संबंध के सबूत नहीं'

मुंबई पुलिस प्रमुख एएन रॉय और आतंकवाद निरोधक दल के प्रमुख केपी रघुवंशी ने कहा कि जाँचकर्ताओं को ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं जिनसे मुंबई में 11 जुलाई को हुए धमाकों का संबंध न्यूयॉर्क पर 11 सितंबर को हुए हमलों स्थापित हो.

उनका ये भी कहना था कि इन धमाकों में अल क़ायदा का हाथ होने के भी कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.

पुलिस के अनुसार विशेष जाँच दल को जुलाई बम धमाकों और 1993 में मुंबई में हुए विस्फोटों और मालेगाँव में आठ सितंबर को हुए धमाकों के बीच कोई संबंध होने के भी कोई सबूत नहीं मिले हैं.

फ़िलहाल पुलिस ने इस पूरी मामले के बारे में हुई साज़िश पर टिप्पणी करने से ये कहते हुए इनकार कर दिया कि पुलिस अब भी अपनी कार्रवाई में लगी हुई है.

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