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शनिवार, 30 सितंबर, 2006 को 15:27 GMT तक के समाचार
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'पाकिस्तान की नीयत बदले, तो फ़र्क पड़े'
मुंबई
पुलिस के अनुसार इस मामले में 15 लोग गिरफ़्तार किए गए हैं
जुलाई में हुए मुंबई बम धमाकों में पुलिस ने जाँच के बाद पाकिस्तानी गुप्तचर एजेंसी आईएसआई और चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को योजना बनाने का दोषी ठहराया है.

लेकिन पाकिस्तान ने इन सभी आरोपों का खंडन किया है.

लंबे समय तक राजनयिक रहे, कूटनीतिक मामलों के जानकार जी पार्थ सारथी का कहना है कि इस मामले में जब तक पाकिस्तान की नीयत नहीं बदलती तब तक कोई भी साझा आतंकवाद निरोधक व्यवस्था बनाने से कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा.

उनका कहना है कि पाकिस्तान का नाम लिए जाने से उन्हें कोई आश्चर्य नहीं हुआ क्योंकि आरडीएक्स विस्फोटक का इस्तेमाल और लोगों को इसके इस्तेमाल का प्रशिक्षण भारत में नहीं मिलता.

ऐसा पाकिस्तान की गुप्तचर सेवा आईएसआई करती है और लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठन इसका प्रशिक्षण देते हैं.

 हवाना में जिस तरह से मनमोहन-मुशर्रफ़ बातचीत हुई और जिस तरह हमने पाकिस्तान को क्लीन चिट दी और कहा कि वो भी आतंकवाद से पीड़ित है, उसके लिए हमें पछताना पड़ेगा
जी पार्थ सारथी

उनके मुताबिक चिंता के दो विषय हैं - पहला ये कि देश के भीतर अल्पसंख्यक समुदाय के कुछ नागरिक इसमें शामिल पाए गए हैं और दूसरा ये कि सांप्रदायिक सदभाव न बिगड़े और इसके लिए हर संभव प्रयास हो.

उनका कहना है, "इसमें पाकिस्तान का हाथ बताया गया है. ये कोई नई बात नहीं है कि ऐसे तत्व बंगलादेश या नेपाल की सीमा से आते हैं क्योंकि ऐसा कई साल से होता रहा है. मौलाना मसूद अज़हर भी बंगलादेश के रास्ते आए थे. नेपाल का रास्ता है प्रशिक्षित लोगों को लाने के लिए ही नहीं बल्कि सामग्री, हथियार और नकली मुद्रा लाने के लिए भी इस्तेमाल होता है."

उनका कहना है कि ये चिंता के विषय तो हैं ही लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि जो बाहर के लोग हैं उनकी भूमिका को हम नज़रअंदाज कर दें.

उनका कहना है, "हवाना में जिस तरह से मनमोहन-मुशर्रफ़ बातचीत हुई और जिस तरह हमने पाकिस्तान को क्लीनचिट दी और कहा कि वो भी आतंकवाद से पीड़ित है, उसके लिए हमें पछताना पड़ेगा."

उनका सवाल है, "क्या आपने दाऊद इब्राहिम को 1993 के बम विस्फ़ोट की जाँच में शामिल किया होता तो उससे कोई नतीजा निकलता. ये कोई गुप्त बात नहीं है कि लश्कर और जैश को आईएसआई का समर्थन मिलता है."

 जब सचिव स्तर की बातचीत से कुछ हासिल नहीं हुआ तो क्या देश को इस तरह गुमराह करना क्या उचित है कि हमें नई व्यवस्था कायम करके सूचना मिलने वाली है
जी पार्थासार्थी

'नीयत बदले, नई सोच की ज़रूरत'

पार्थ सारथी का कहना है, "जब तक नीयत नहीं बदलती हैं आप ढ़ेर सारी संयुक्त व्यवस्थाएँ क़ायम कर दें कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा."

उनका कहना है कि जहाँ तक भारत-पाकिस्तान की ताज़ा संयुक्त व्यवस्था की बात है तो ऐसा संपर्क गृह सचिव स्तर पर है और उससे कुछ नतीजा तो नहीं निकला, तो अब तो अतिरिक्त सचिव स्तर की ही बात हो रही है.

पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त रह चुके पार्थ सारथी का कहना है, "जब सचिव स्तर की बातचीत से कुछ हासिल नहीं हुआ तो क्या देश को इस तरह गुमराह करना क्या उचित है कि हमें नई व्यवस्था क़ायम करके सूचना मिलने वाली है."

उन्होंने कहा, "मेरे विचार में नए तरीक़े से सोच-विचार करने की ज़रूरत है. उदाहरण के तौर पर रूस आतंकवादियों का विदेशों में जाकर पीछा करता है और ये एक राष्ट्रीय नीति है. इस पर सोच-विचार करना पड़ेगा."

पार्थ सारथी के अनुसार प्रधानमंत्री ने ख़ुद कहा है कि देश के विभिन्न भागों में कई ऐसे छोटे-छोटे गुट हैं जो आईएसआई के संपर्क में हैं, जहाँ पाकिस्तान के नागरिक आकर बसते हैं, इसे ख़त्म करना होगा.

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