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कैसा था माहिम स्टेशन का दृश्य | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जब विस्फ़ोट हुआ तो मैं अपने एक दोस्त के पास बैठी थी. मेरे पास फ़ोन आया तो मुझे लगा कि यह अफ़वाह है. एक पत्रकार होने के नाते मैं तुरंत माहिम स्टेशन की तरफ़ दौड़ पड़ी अपने दोस्तों के साथ. वहाँ जाकर देखा तो अफ़रा तफ़री मची हुई थी. लोग इधर उधर भाग रहे थे. यह मंज़र हम देख ही रहे थे कि पता चला कि कई लोगों की मौत न केवल विस्फोट में हुई है बल्कि कई लोग भगदड़ में भी मारे गए हैं. मौजूद लोगों ने बताया कि विस्फोट के बाद कई महिलाएं और कई पुरुष डर के मारे उस ट्रेन से कूद पड़े जिसमें विस्फोट हुआ था और ये सभी लोग दूसरी ओर से आ रही ट्रेन के नीचे आ गए. विस्फोट के बाद लोगों में सुरक्षित स्थान पर पहुँचने की होड़ लगी हुई थी. कोई कुछ बता नहीं पा रहा था कि क्या हुआ. कई औरतें रो रही थीं. एक-दूसरे की मदद कई लोग तो बेहोश पड़े थे और उन्हें देखने वाला कोई भी नहीं था. जब मैं वहां पहुंची तो पहले तो मैं बिल्कुल डर गई और मुझे समझ में नहीं आया कि क्या करुं. मैं पहली बार ऐसा विस्फोट के बाद का दृश्य देख रही थी. फिर मैंने खुद को संयत किया. मैंने देखा कि झोपड़ियों में रहने वाले कई लोग लाशों को निकालने में लग गए थे. सब एक दूसरे की मदद करने मे लगे हुए थे. फ़ोन लाइनें काम नहीं कर रही थीं. मैने सबसे पहले अपने दोस्तों को अपने सुरक्षित होने की जानकारी दी. माहिम स्टेशन पर पुलिस और फ़ायर ब्रिगेड बहुत देर के बाद पहुंची और देखने में आया कि पुलिस कम और आम जनता लोगों की मदद अधिक कर रही थी. मैंने यह भी देखा कि आम लोगों ने मीडिया वालों को हटने के लिए भी कहा और आम लोगों का कहना था कि मीडिया वाले तस्वीरें खींचने की बजाय लोगों को बचाएँ. | इससे जुड़ी ख़बरें मुंबई में सात धमाके, 170 मौतें11 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस मुंबई धमाकों का वीडियो11 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस अमरीका और पाकिस्तान ने कड़ी निंदा की11 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस कब-कब बना मुंबई निशाना...11 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस कश्मीर में बम धमाके, आठ मरे11 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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